केजरीवाल को कौन सा डर सता रहा; CM रेखा गुप्ता ने क्यों उठाया ये सवाल
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाते हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाते हैं। रेखा गुप्ता ने एक जनसभा में कहा, आज दिल्ली और पूरा देश साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। मैंने देखा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल वकील हो गए हैं। वह अदालत में जाकर अपनी सफाई पेश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल का प्रमुख संस्थानों को निशाना बनाने का पुराना इतिहास है। इसी के साथ उन्होंने सवाल किया है कि केजरीवाल को किस बात का डर है?
सीएम रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर लोकतांत्रिक संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस एजेंसी ने भी केजरीवाल के खिलाफ दो शब्द कह दिए, उन्होंने उसको निशाना बनाया, फिर चाहे वह सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), निर्वाचन आयोग, प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल और यहां तक कि न्यायपालिका ही क्यों न हो।
'न्यायपालिका पर सवाल उठा रहे'
उन्होंने कहा, आज केजरीवाल न्यायपालिका पर सवाल उठा रहे हैं। जब फैसले उनके पक्ष में आते हैं तब इन संस्थाओं की तारीफ करते हैं, लेकिन अब उन्होंने फिर से न्यायपालिका पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। मैं पूछना चाहती हूं कि उन्हें कौन सा डर सता रहा है कि वह लोकतंत्र के इतने मजबूत स्तंभों पर उंगली उठा रहे हैं? मुख्यमंत्री ने कहा, दिल्ली और देश की जनता इस व्यवहार को देख रही है। देश को न्यायपालिका पर भरोसा है और न्याय की जीत होगी।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी जनता को निराश कर चुकी है। केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष स्वयं दलीलें पेश की और उन्हें सुनवाई से अलग होने की अपील की।
अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा से कहा था कि शराब नीति मामलों में उनके पहले के फैसलों ने उन्हें लगभग दोषी और भ्रष्ट घोषित कर दिया था, और उन्हें आशंका है कि अगर वह आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर सुनवाई जारी रखती हैं तो उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।
अरविंद केजरीवाल ने दलील दी कि जज के सुनवाई से अलग होने से जुड़े कानून के तहत सवाल किसी न्यायधीश की ईमानदारी या निष्पक्षता का नहीं, बल्कि मुकदमे के पक्षकार के मन में पक्षपात की आशंका का होता है।
जस्टिस शर्मा ने आप प्रमुख, शराब नीति मामले में आरोपमुक्त किए गए अन्य लोगों के वकील और सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। स्पष्ट किया कि राज्य अपने नागरिकों के कल्याण के लिए उपाय लागू करने के लिए बाध्य है। न्यायालय ने आगे कहा कि एक संवैधानिक न्यायालय भारत के संविधान की भावना और उसके निर्देशक सिद्धांतों की अनदेखी नहीं कर सकता।




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