सत्येंद्र जैन के मानहानि मामले में BJP विधायक करनैल सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, समन जारी
दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मानहानि शिकायत पर BJP विधायक करनैल सिंह को समन जारी कर पेश होने का आदेश दिया है। सत्येंद्र जैन का आरोप है कि करनैल सिंह ने उन पर झूठे आरोप लगाए जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है।

सत्येंद्र जैन की मानहानि के मामले में भाजपा विधायक करनैल सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की मानहानि शिकायत पर करनैल सिंह को समन जारी कर 19 जनवरी को पेश होने का आदेश दिया है। सत्येंद्र जैन का आरोप है कि करनैल सिंह ने एक इंटरव्यू में उनके खिलाफ झूठे बयान दिए। वहीं करनैल सिंह के वकील ने दलील दी कि ये बातें मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित थीं और मामला विशेष कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
छवि खराब करने की कोशिश का आरोप
आम आदमी पार्टी के बड़े नेता सत्येंद्र जैन ने भाजपा विधायक करनैल सिंह के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि करनैल सिंह ने 19 जनवरी 2025 को एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उनके खिलाफ झूठी बातें कहीं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की।
क्या लगाए थे आरोप?
सत्येंद्र जैन की शिकायत के अनुसारए करनैल सिंह ने दावा किया था कि ईडी को जैन के घर से 37 किलो सोना मिला है और उनके पास 1100 एकड़ जमीन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि जैन ने भ्रष्टाचार के जरिए यह संपत्ति बनाई है। शिकायत में कहा गया है कि करनैल ने उन्हें भूमाफिया और धोखेबाज कहा और दावा किया कि वे जल्द ही फिर से जेल जाएंगे।
बचाव में क्या दलील?
सत्येंद्र जैन के वकील रजत भारद्वाज ने बताया कि कोर्ट ने शिकायत को स्वीकार करते हुए करनैल सिंह को समन भेज दिया है। दूसरी तरफ करनैल सिंह के वकील विनोद दहिया ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने जो भी आरोप लगाए वे ईडी की प्रेस विज्ञप्ति और मीडिया में छपी जानकारियों पर आधारित थे।
सुनवाई के अधिकार पर सवाल
करनैल सिंह के वकील विनोद दहिया ने यह भी तर्क दिया कि चुनाव उम्मीदवार होने के नाते करनैल का यह कर्तव्य था कि वे जनता को अपने विपक्षी नेता की हकीकत बताएं। इसके अलावा उन्होंने कोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या यह अदालत इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार रखती है।
करनैल की दलीलें खारिज, सत्येंद्र के पक्ष में फैसला
करनैल की ओर से अधिवक्ता विनोद दहिया ने यह भी दलील दी कि कथित घटना के समय वह न तो सांसद थे और न ही विधायक, इसलिए एमपी-एमएलए मामलों की सुनवाई करने वाली यह विशेष अदालत इस शिकायत को नहीं सुन सकती। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए सत्येंद्र के पक्ष में फैसला दिया और शिकायत पर संज्ञान लिया।




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