जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ केजरीवाल की याचिका, क्यों CBI ने लालू प्रसाद यादव का दिया उदाहरण
अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और चार अन्य की ओर से दायर याचिका के जवाब में सीबीआई ने हलफनामा दाखिल किया है। सीबीआई ने अपने जवाब में बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया है।

कथित शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दिए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से केस को ट्रांसफर कराना चाहते हैं। इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया की ओर से दलील रखे जाने के बाद सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने भी हलफनामा दायर करके केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और चार अन्य की याचिका का विरोध किया है। सीबीआई ने अपने जवाब में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चल रहे केस का भी उदाहरण दिया है।
अपने हलफनामे में एजेंसी ने इस दावे का खंडन किया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा वैचारिक रूप से अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) से जुड़ी हैं, जो जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कानूनी शाखा है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने दलील दी कि एबएपी की ओर से आयोजित सेमिनार में जाना वैचारिक झुकाव का संकेत नहीं है।
‘फिर तो कई जजों को…’
हलफनामे में कहा गया है कि सिर्फ इसलिए आरोप लगाना कि जज ने गैर राजनीतिक लीगल सेमिनार में हिस्सा लिया, निराधार है और अदालत के अधिकार को कमजोर करने और न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने का प्रयास है। यह संभावित रूप से अदालत की अवमानना का मामला बन सकता है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने आगे कहा, 'अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में शामिल होना यदि किसी जज का वैचारिक झुकाव दिखाता है तो बड़ी संख्या में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों को राजनीति से जुड़े शख्सों के केसों से हटाना पड़ता।'
जल्दबाजी के आरोपों को भी नकारा
एजेंसी ने यह भी रेखांकित किया कि जस्टिस शर्मा ने आबकारी नीति केस नामित लोगों के पक्ष में भी फैसले दिए हैं। सीबीआई ने इस बात का भी खंडन किया कि जस्टिस शर्मा इस केस की जल्दबाजी में सुनवाई कर रही हैं। सीबीआई के दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से करना है और सर्वोच्च अदालत के निर्देशों का पालन करना पक्षपात/पूर्वाग्रह नहीं कहा जा सकता है।
सीबीआई ने लालू का नाम लेकर क्या कहा
उदाहरण के तौर पर सीबीआई ने बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े केस का भी हवाला दिया, जिसकी सुनवाई जस्टिस शर्मा कर रही हैं। सीबीआई ने कहा कि इस केस में अदालत ने 3 महीनों में 27 बार सुनवाई की है। सीबीआई ने आगे कहा कि ट्रायल कोर्ट पर प्रथम दृष्टया की गईं टिप्पणियों और स्टे में कोई त्रुटि नहीं है। गौरतलब है कि केजरीवाल और सिसोदिया के अलावा दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह ने जस्टिस शर्मा की बेंच से केस को ट्रांसफर करने की मांग की है। केजरीवाल ने 6 अप्रैल को खुद इस मामले में दलीलें पेश कीं। अगली सुनवाई अब 13 अप्रैल को होनी है।




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