संदीप पाठक को कॉल करते रहे केजरीवाल; AAP प्रमुख को किस-किस पर आखिर तक था भरोसा
आम आदमी पार्टी से भाजपा में गए सात सांसदों में सबसे चौंकाने वाला नाम संदीप पाठक है। सूत्रों के अनुसार, जॉइनिंग के दिन सुबह तक केजरीवाल पाठक को कॉल करते रहे। उन्हें बताया गया था कि वो अभी भी आप के साथ हैं।

आम आदमी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका देते हुए उसके सात राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा नाम संदीप पाठक का है, उन्हें पार्टी के पंजाब संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। उनके इस कदम ने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व को चौंकाया बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल को इस संभावित टूट की भनक तो दो दिन पहले बुधवार को ही लग गई थी, लेकिन आखिरी समय तक उन्हें संदीप पाठक के पार्टी के साथ बने रहने का भरोसा था। बताया जा रहा है कि केजरीवाल लगातार सांसदों से संपर्क साधते रहे, लेकिन कई फोन कॉल्स के जवाब नहीं मिले और कुछ से अस्पष्ट जवाब आए। धीरे-धीरे साफ हो गया कि मामला केवल असंतोष का नहीं, बल्कि पहले से तय राजनीतिक कदम का है।
भाजपा जॉइनिंग के दिन तक पाठक को कॉल करते रहे केजरीवाल
संदीप पाठक का जाना आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका इसलिए माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पंजाब में पार्टी का संगठन खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक जीत के पीछे भी उन्हें प्रमुख रणनीतिकार माना जाता है। लंबे समय तक संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले पाठक हाल के महीनों में पार्टी के अंदर हाशिए पर चले गए थे, जिसे इस फैसले की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार सुबह तक केजरीवाल संदीप पाठक को कॉल करते रहे। उन्हें बताया गया कि संदीप पाठक अभी भी पार्टी के साथ हैं। हालांकि कुछ ही घंटों में पाठक की तस्वीरें भाजपा मुख्यालय से सामने आईं तो चीजें स्पष्ट हो गईं।
आप में टूट, राघव चड्ढा की अहम भूमिका!
इस पूरे घटनाक्रम में राघव चड्ढा की भूमिका भी अहम बताई जा रही है। माना जा रहा है कि उन्होंने ही अन्य सांसदों को साधने में बड़ी भूमिका निभाई। वहीं, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह के भी राघव चड्ढा के साथ भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस कदम से भले ही पंजाब की राजनीति में तुरंत बड़ा असर न दिखे, लेकिन संसद के गणित में बड़ा बदलाव जरूर आया है। राज्यसभा में बीजेपी की संख्या बढ़ने से अब केंद्र सरकार के लिए विधेयक पारित कराना पहले से आसान हो जाएगा।
सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी
आम आदमी पार्टी ने कहा है कि वह पार्टी छोड़ने वाले अपने सांसदों को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग करेगी। वहीं, पार्टी छोड़ने वाले सांसदों ने पलटवार करते हुए 'आप' पर भ्रष्टाचार और विचारधारा से भटकने का आरोप लगाया। इन सात सांसदों ने कहा कि उन्होंने डर की वजह से नहीं, बल्कि पार्टी के नेतृत्व से बढ़ती "निराशा, दूरी और नाराजगी" के कारण पार्टी छोड़ी है।




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