नहीं आए, फिर से नोटिस भेजिए; ED की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी की ओर से दायर याचिका पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में केजरीवाल को मिली राहत को चुनौती दी गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर याचिका पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। बुधवार को केजरीवाल की ओर से कोई अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने एक बार फिर नोटिस भेजने को कहा और 29 फरवरी को अगली सुनवाई की तारीख निश्चित की।
ईडी ने निचली अदालत के उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की है जिसमें केजरीवाल को एजेंसी द्वारा जारी समन की कथित अवहेलना के आरोप में बरी कर दिया गया था। पूर्व में नोटिस दिए जाने के बाद भी केजरीवाल की ओर से किसी के पेश नहीं होने का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा, ‘प्रतिवादी ने अग्रिम सूचना मिलने के बावजूद उपस्थित न होने का विकल्प चुना। नया नोटिस जारी करें। मामले को 29 अप्रैल को सूचीबद्ध किया जाए। टीसीआर (ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड) मंगवाया जाए।’
ईडी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि केजरीवाल को बरी करने में निचली अदालत ने गंभीर गलती की है, खासकर तब जब उनके द्वारा समन स्वीकार करने और उसका जवाब न देने का तथ्य निर्विवाद है। उन्होंने कहा कि कई फैसले हैं जिनमें यह कहा गया है कि जब किसी दस्तावेज पर कोई विवाद न हो, तो उसे साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। वकील विवेक गुरनानी भी हुसैन के साथ पेश हुए।
ईडी ने क्या कहा है याचिका में
ईडी ने निचली अदालत में अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन पर अमल नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए। उसका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने बेबुनियाद आपत्तियां उठाईं और जानबूझकर ऐसी दलीलें पेश कीं कि उन्हें जांच में शामिल न होना पड़े। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि ईडी यह साबित करने में विफल रही है कि केजरीवाल ने जानबूझकर उन्हें जारी किए गए समन का उल्लंघन किया।
'गिरफ्तारी की जरूरत' वाला मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में
ईडी का आरोप है कि मामले के अन्य आरोपी केजरीवाल के संपर्क में थे और उन्होंने अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति को तैयार करने में सहयोग किया था, जिसके बदले उन्हें अनुचित लाभ मिला और आम आदमी पार्टी (आप) को रिश्वत हासिल हुई। केजरीवाल फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अंतरिम जमानत पर हैं। उच्चतम न्यायालय ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 'गिरफ्तारी की जरूरत' के पहलू से संबंधित सवालों को गहन विचार-विमर्श के लिए एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया है।
सीबीआई केस में भी मिल चुकी राहत
निचली अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से विफल रहा और पूरी तरह से निराधार साबित हुआ। सीबीआई की इस फैसले के खिलाफ याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है।




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