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अल-फलाह पर ED की गाज, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में संस्थापक जवाद अहमद गिरफ्तार

दिल्ली धमाके की छानबीन के बीच ईडी ने अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को अरेस्ट कर लिया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। जवाद अहमद सिद्दीकी को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। 

Tue, 18 Nov 2025 10:38 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, राजन शर्मा, नई दिल्ली
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अल-फलाह पर ED की गाज, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में संस्थापक जवाद अहमद गिरफ्तार

दिल्ली के लाल किला के पास हुए विस्फोट के मामले की छानबीन के बीच ईडी की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ईडी ने मंगलवार को फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी के न्यासियों और प्रवर्तकों के खिलाफ एनसीआर में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि जवाद अहमद सिद्दीकी की गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत की गई है।

झूठा दावा करने का आरोप

सूत्रों की मानें तो यह गिरफ्तारी अल फलाह ग्रुप पर चल रही जांच के तहत की गई छापेमारी में मिले अहम सबूतों के बाद हुई है। ईडी ने जांच 2 एफआईआर के आधार पर शुरू की है। ईडी ने इस मामले में एनआईए और दिल्ली पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकियों का संज्ञान लिया है। इनमें आरोप था कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने फर्जी तरीके से NAAC मान्यता और UGC 12(B) स्टेटस का झूठा दावा किया। आरोप है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने ऐसा इसलिए किया ताकि छात्रों और अभिभावकों को धोखा देकर गलत फायदा उठाया जा सके।

सामने आया था संदिग्धों का जुड़ाव

बता दें कि दिल्ली धमाके के बाद हमलावर समेत कुछ अन्य संदिग्धों का जुड़ाव अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आया था। शुरुआती जांच में पाया गया था कि हमलावर डॉ. उमर समेत कुछ संदिग्ध अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करते थे। हालांकि लाल किला के पास हुए धमाके के बाद आई इन रिपोर्टों के बाद अल फलाह ने संदिग्धों से पल्ला झाड़ लिया था। हालांकि अल फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर लगातार नई जानकारियां सामने आ रही थीं।

जवाद सिद्दीकी ही संभालता है कमान

यूजीसी ने भी अल फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर छानबीन की थी। यूजीसी का कहना था कि यूनिवर्सिटी केवल सेक्शन 2(f) के तहत आती है। उसने 12(B) के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया। जांच में पता चला कि 1995 से चल रहा अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को जवाद सिद्दीकी ही नियंत्रित करता है। यही नहीं अल फलाह ट्रस्ट के तहत चलने वाले सभी संस्थानों की फंडिंग इसी के हाथ में रहती है।

48 लाख कैश जब्त

सूत्रों की मानें तो ईडी ने मंगलवार को सुबह करीब सवा पांच बजे छापे मारने शुरू किए। ईडी की कई टीम ने अल फलाह ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े कम से कम 25 परिसरों की तलाशी ली। ED की टीमों ने दिल्ली के ओखला इलाके में एक दफ्तर पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में छापेमारी की। ईडी ने छापों में 48 लाख रुपये कैश, कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए हैं। सूत्रों की मानें तो ईडी ने इन छापों में कई शेल कंपनियों के सबूत पकड़े हैं।

फंड डायवर्जन के आरोप

सूत्र बताते हैं कि जांच में सामने आया कि ट्रस्ट के करोड़ों रुपये परिवार की कंपनियों में घुमाए गए। इतना ही नहीं अल फलाह से जुड़े संस्थानों के निर्माण और कैटरिंग के कॉन्ट्रैक्ट भी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को दिए गए। ED का कहना है कि मिले सबूत कैश रिकवरी, फंड डायवर्जन, लेयरिंग और ट्रस्ट पर पूरी पकड़ जवाद सिद्दीकी की भूमिका साफ साबित करते हैं। ईडी की ओर से सिद्दीकी को कोर्ट में पेश कर ED रिमांड मांगी गई है।

वित्तीय अनियमितताओं की जांच

ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि एजेंसी की यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी कंपनियों की चल रही जांच का हिस्सा है। अल फलाह ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की जांच की जा रही है। ईडी की टीमों की ओर से ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी प्रशासन और वित्त संभालने वाले कर्मियों के खिलाफ छापे मारे हैं। बताया जाता है कि ईडी की जांच के दायरे में अल फलाह ग्रुप से जुड़ी कम से कम नौ फर्जी कंपनियां हैं।

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एक ही पते पर रजिस्टर्ड मिलीं कंपनियां

अधिकारियों का कहना है कि ये कंपनियां एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गई हैं। अल फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद जिले के धौज क्षेत्र में स्थित है। यह एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी है। बता दें कि दिल्ली विस्फोट की जांच एनआईए कर रही है। एनआईए ने अब तक इस मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों ही संदिग्धों को हमलावर डॉ. उमर नबी का कथित करीबी सहयोगी बताया जा रहा है।

(पीटीआई और हिन्दुस्तान संवाददाता के इनपुट पर आधारित)

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