फरीदाबाद में मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर 42 लाख की ठगी, 12वीं और M.Sc पास गिरफ्तार
साइबर अपराध थाना बल्लभगढ़ की टीम ने मोबाइल टावर लगवाने के नाम पर 42 लाख 63 हजार 500 रुपये की ठगी के मामले में दो बैंक खाता धारकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों की पहचान फिरोजाबाद यूपी निवासी अवनीश और अरसौनी के रूप में हुई है।

साइबर अपराध थाना बल्लभगढ़ की टीम ने मोबाइल टावर लगवाने के नाम पर 42 लाख 63 हजार 500 रुपये की ठगी के मामले में दो बैंक खाता धारकों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों की पहचान फिरोजाबाद यूपी निवासी अवनीश और अरसौनी के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया है कि दोनों आरोपी बैंक खाताधारक है।
एक 12वीं पास, तो दूसरा M.Sc
अवनीश के खाते में सवा लाख रुपये और अरसौनी के बैंक खाते में छह लाख 73 हजार रुपये आये थे। अनवीश 12वीं और अरसौनी एमएससी पास है। दोनों आरोपी अलग-अलग सीएससी सेंटर चलाते हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियाें को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।
20 साल के एग्रीमेंट का देते थे झांसा
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि जुन्हेड़ा गांव निवासी पीड़ित व्यक्ति ने साइबर अपराध थाना बल्लभगढ में दी अपनी शिकायत में बताया कि 17 अक्तूबर 2025 को उसके पास इंडस टावर कंपनी से एक कथित महिला कर्मचारी का फोन आया था कि उनकी कंपनी के मोबाइल टावर लगाने का काम करती है। उनकी कंपनी एक टावर लगवाने का 20 साल का एग्रीमेंट करती है। फिर 40 लाख एडवांस, 25 हजार रुपये प्रत्येक महीना, एक व्यक्ति को टावर पर नौकरी और 40 लाख टावर लगने के बाद देती है।
करीब साल भर में ठगे 42 लाख
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया था कि 29 अक्तूबर 2024 से 10 जून 2025 के बीच अलग-अलग चार्ज जैसे रजिस्ट्रेशन, जीएसटी , आरबीआई, एलटीसी चार्ज, टीडीएस चार्ज, सिक्युरिटी चार्ज, स्टांप ड्यूटी चार्ज, ग्रीनकार्ड चार्ज, पेमेंट ट्रांसफर चार्ज और कमीशन आदि के नाम पर ठगों ने उससे करीब 42 लाख 63 हजार 500 रुपये अपने बैंक खातों में जमा करवा लिए थे।
दिल्ली पुलिस ने द्वारका एक्सप्रेसवे पर एक व्यक्ति से 15 लाख रुपये लूटने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया और लूटी गई रकम में से 11.96 लाख रुपये बरामद कर लिए। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) पर छह अप्रैल को सूचना मिली थी कि द्वारका एक्सप्रेसवे पर सेक्टर 22 स्थित दिल्ली अपार्टमेंट में यह घटना घटी, जिसके बाद नौ अप्रैल को मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान, एक टीम ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, मोबाइल लोकेशन का पता लगाया और संदिग्धों की पहचान करने के लिए स्थानीय मुखबिरों की मदद ली।




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