आतंकी मामले के आरोपी को 3 दिन की अंतरिम जमानत, शुभ कार्य की वजह से मिली राहत; खर्चा भी राज्य सरकार उठाएगी
सुनवाई के दौरान जब यह सवाल आया कि अदालत में नियमित जमानत की अर्जी लंबित होने पर, अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकती। तो वकील ने कहा कि हाई कोर्ट ने कानून के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कस्टडी पैरोल मंजूर कर दी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना मानवीय पहलू दिखाते हुए आतंकी वारदात के एक आरोपी को तीन दिन की सशर्त अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने यह राहत UAPA केस के आरोपी हबीब उर रहमान उर्फ हबीब को अपनी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए दी। हबीब की बेटी की शादी 31 मई को मुंबई में होना है। अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता लगभग 8 सालों से हिरासत में है और कस्टडी पैरोल का खर्च उठाने में असमर्थ है। इसलिए कोर्ट ने उसके आने-जाने का खर्च भी राज्य सरकार को उठाने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि इस अवधि के दौरान दो पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में पूरे समय उसके साथ रहेंगे।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और मधु जैन की डिवीजन बेंच ने तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद आरोपी के लिए 3 दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर कर ली। जिसकी अवधि 30 मई से 1 जून तक होगी। हबीब साल 2017 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज किए गए एक मामले में आरोपी हैं। आरोपी को राहत देते हुए अदालत ने एक शर्त भी लगाई, कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता हबीब उर रहमान को अपने घर और शादी की जगह (जहां मुंबई में समारोह होगा) के अलावा किसी और जगह जाने की अनुमति नहीं होगी।
पैरोल की अवधि के दौरान साथ रहेंगे दो पुलिसकर्मी
इस दौरान हाई कोर्ट ने जेल सुप्रिटेंडेंट को निर्देश दिया कि कस्टडी पैरोल की अवधि के दौरान आरोपी के साथ दो पुलिस अधिकारियों को भी भेजा जाए, जो कस्टडी पैरोल की अवधि के दौरान पूरे समय सादे कपड़ों में उसके साथ मौजूद रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की बेटी की शादी है, ऐसे में वे दोनों पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में उसके साथ रहेंगे। अदालत ने कहा कि कस्टडी पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद अपीलकर्ता को वापस दिल्ली लाया जाएगा।
इस बारे में 29 मई को जारी आदेश में कोर्ट ने कहा, 'इस तथ्य पर विचार करते हुए कि अपीलकर्ता की बेटी की शादी होने वाली है, कोर्ट याचिकाकर्ता को 30 मई 2026 से 1 जून 2026 तक की अवधि के लिए कस्टडी पैरोल देता है, ताकि वह मुंबई में अपनी बेटी की शादी में शामिल हो सके।'
लंबित है नियमित जमानत की याचिका
हबीब उर रहमान के वकील आरिफ खान ने अपनी बेटी की शादी के आधार पर 30 दिनों की अंतरिम जमानत के लिए एक अर्जी भी दायर की थी। सुनवाई के दौरान जब यह सवाल आया कि अदालत में नियमित जमानत की अर्जी लंबित होने पर, अंतरिम जमानत की अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकती। तो वकील ने कहा कि हाई कोर्ट ने कानून के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कस्टडी पैरोल मंजूर कर दी।
अपीलकर्ता ने नई दिल्ली में NIA स्पेशल कोर्ट द्वारा 12 नवंबर, 2025 को पारित उस आदेश को चुनौती देते हुए एक अपील दायर की है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने उसकी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 6 जुलाई की तारीख तय की है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका पिछले साल खारिज कर दी थी।




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