ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिल्डरों पर चला प्राधिकरण का हंटर, अवैध रूप से बन रहे 300 फ्लैट सील
ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने अवैध कॉलोनाइजरों और बिल्डरों के खिलाफ सख्त अख्तियार कर लिया है। प्राधिकरण ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के खोदना कलां और वैदपुरा गांवों में बन रहे करीब 300 फ्लैटों को सील कर दिया।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के खोदना कलां और वैदपुरा में अवैध रूप से बन रहे कई आवासीय भवनों को प्राधिकरण की टीम ने शनिवार को सील कर दिया। इन भवनों में करीब 300 फ्लैट बन रहे हैं। पुलिस की मौजूदगी में इन दोनों स्थानों पर निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी को शिकायत मिली थी कि अधिसूचित क्षेत्र के वैदपुरा और खोदना कलां गांव में अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। उनके निर्देश पर प्राधिकरण के परियोजना विभाग की टीम ने मौके पर जाकर देखा तो शिकायत सही पाई गई। महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह ने बताया कि शनिवार को वर्क सर्किल-दो के वरिष्ठ प्रबंधक नरोत्तम सिंह के नेतृत्व में मौके पर पहुंची टीम ने वैदपुरा गांव के खसरा संख्या- 332, 333, 334 और 615 पर अवैध रूप से बन रहे बहुमंजिला मकानों को सील कर दिया गया।
प्राधिकरण के अधिकारी के मुताबिक, इसी तरह खोदना कलां गांव के खसरा संख्या- 323, 324 एवं 194 की जमीन पर प्राधिकरण की अनुमति के बिना निर्माण किया जा रहा था। पुलिस बल की उपस्थिति में प्राधिकरण की टीम ने यहां भी अवैध निर्माण को रोक सील कर दिया। इस दौरान कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
फ्लैट लेने से पहले प्राधिकरण से जानकारी लें
ग्रेटर नोएडा के एसीईओ सुमित यादव ने कहा कि शहर के अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। यहां बिना अनुमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। ग्रेटर नोएडा में जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले प्राधिकरण से संपर्क कर पूरी जानकारी जरूर प्राप्त कर लें, अन्यथा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अवैध कॉलोनी में अपनी गाढ़ी कमाई न फंसाएं।
प्राधिकरण ने कहा, ऐसी इमारतें पूरी तरह अवैध
इस बारे में प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि गांवों की जमीन पर फ्लैट बनाकर बेचना या कॉलोनी काटना पूरी तरह से अवैध है। इनमें से किसी भी इमारत या कॉलोनी का नक्शा प्राधिकरण की ओर से मंजूर नहीं है। प्राधिकरण यहां पर वैध सीवर और पेयजल कनेक्शन भी नहीं देता। सभी इमारतें प्राधिकरण की बिना मंजूरी के बन रही हैं। कई इमारतें मुआवजा उठी या सरकारी जमीन पर भी बन गई हैं, जिनको गिराया जाएगा। गांवों में बने फ्लैटों को खरीदने से पहले लोगों को चाहिए कि वह जमीन को लेकर प्राधिकरण और तहसील में जाकर जमीन की जांच करें।




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