You are demoralising High Court CJI Suryakant refuses to entertain petitions alleging hate speech by Assam CM Himanta यह तो खतरनाक ट्रेंड है, आप कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं; CM हिमंता से जुड़े केस में बिदके CJI सूर्यकांत, India News in Hindi - Hindustan
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यह तो खतरनाक ट्रेंड है, आप कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं; CM हिमंता से जुड़े केस में बिदके CJI सूर्यकांत

CJI ने कहा कि आजकल हर मामले में खासकर चुनाव से पहले, सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जो परेशान करने वाला है। इसके बाद CJI ने कहा  कि आप हाई कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं। HC को कम मत आंकिए।

Mon, 16 Feb 2026 04:35 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यह तो खतरनाक ट्रेंड है, आप कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं; CM हिमंता से जुड़े केस में बिदके CJI सूर्यकांत

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार (16 फरवरी) को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कथित तौर पर उनके हेट स्पीच की वजह से कार्रवाई करने की मांग की गई थी। ये याचिका CPI (M) के नेता एनी राजा और असमिया विद्वान हिरेन गोहैन ने दाखिल की थी। याचिका में मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ कथित हेट स्पीच की घटनाओं को लेकर पुलिस केस दर्ज करने के आदेश देने की मांग की गई थी।

याचिका में जिन घटनाओं पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की असम यूनिट द्वारा जारी किया गया एक वीडियो भी शामिल है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता सरमा मुसलमानों की एक तस्वीर पर गोली चलाते हुए दिख रहे हैं। उससे पहले मिया, यानी बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के बारे में कमेंट किए गए थे, जिन्हें BJP ने "गैर-कानूनी घुसपैठिए" कहा है।

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एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है

हालांकि, CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने यह कहते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि आप गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? चीफ जस्टिस ने पिटीशनर्स से पूछा, "आपने पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?" CJI ने कहा कि आजकल हर मामले में, खासकर चुनाव से पहले, सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है, जो परेशान करने वाला है। इसके बाद CJI ने कहा, “आप (गुवाहाटी) हाई कोर्ट को डेमोरलाइज कर रहे हैं। हमारे हाई कोर्ट्स की वैलिडिटी को कम मत आंकिए।”

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HC से जल्द सुनवाई करने को कहा

शीर्ष अदालत ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर संबंधित उच्च न्यायालय प्रभावी रूप से फैसला कर सकता है। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि वह इस मामले को सुनवाई करने का कोई ठोस कारण नहीं देखती और याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया। साथ ही उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले की जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया गया क्योंकि वकीलों ने मामले में अरजेंसी बताई है।

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“शॉर्टकट” के पक्ष में नहीं

बार एंड बेंच के मुताबिक, पीठ ने ये भी स्पष्ट किया कि हालांकि उसके पास सीधे सुनवाई करने का अधिकार है, लेकिन वह ऐसे “शॉर्टकट” के पक्ष में नहीं है, जहां याचिकाएं पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाएं और उच्च न्यायालय को नजरअंदाज किया जाए। अदालत ने कहा कि किसी एक अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने की जल्दबाजी में दूसरे के अधिकार क्षेत्र को कमजोर नहीं किया जा सकता और सुप्रीम कोर्ट सभी मामलों का मंच नहीं बन सकता।

क्या है मामला?

दरअसल, ये याचिकाएं असम में सत्तारूढ़ भाजपा द्वारा साझा एक विवादित वीडियो से भी जुड़ी थीं, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को एक विशेष समुदाय के लोगों पर गोली चलाते दिखाया गया था। वीडियो में “प्वाइंट ब्लैंक शॉट” और “नो मर्सी” जैसे शब्द भी लिखे गए थे। याचिकाओं में यह भी आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि “चार से पांच लाख मिया वोटरों” को मतदाता सूची से हटाया जाएगा और वह और उनकी पार्टी मियाओं के खिलाफ हैं। “मिया” शब्द का इस्तेमाल मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप में किया जाता है।

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