जहांगीर खान ने फलता चुनाव से आखिर क्यों पीछे खींचे कदम? जानें- 'पुष्पा' के झुकने की इनसाइड स्टोरी
पश्चिम बंगाल में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम में फलता विधानसभा क्षेत्र पर पुनर्मतदान से 2 दिन पहले TMC के उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव मैदान से हटने की घोषणा की है। लगे हाथ उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशंसा की है।

पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनावों में फलता विधानसभा क्षेत्र काफी सुर्खियों में रहा था। वहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी के उम्मीदवार जहांगीर खान ने बीच चुनाव एक फिल्मी डायलॉग दिया था और कहा था, 'पुष्पा झुकेगा नहीं..." लेकिन महीने भर भी नहीं हुए कि वही पुष्पा यानी जहांगीर खान अब न सिर्फ झुकते दिख रहे हैं बल्कि चुनावी मैदान से ही भाग खड़े हुए हैं। दरअसल, जहांगीर खान ने फलता सीट पर होने वाले उप चुनाव से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। ऐसा उन्होंने वोटिंग से ठीक दो दिन पहले किया है। जहांगीर खान को TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी समझा जाता है।
फलता के लिए स्पेशल पैकेज दिए जाने का ऐलान करते हुए TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने मंगलवार (19 मई) को बताया कि 21 मई को होने वाले उपचुनाव से वह अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहे हैं और दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उपचुनाव के वोटों की गिनती 24 मई को होगी। खान ने कहा, “मेरा मकसद फलता में शांति और सुरक्षा पक्का करना और उसका ज्यादा से ज्यादा विकास करना है। मेरा विजन 'सोनार फलता' है। अब हमारे मुख्यमंत्री फलता के लोगों के लिए एक स्पेशल पैकेज दे रहे हैं; इसी वजह से मैं अपनी उम्मीदवारी वापस ले रहा हूं। मैंने फलता के विकास और शांति के लिए अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है।”
व्यक्तिगत फैसला है या तृणमूल ने थोपा है?
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह उनका व्यक्तिगत फैसला है या तृणमूल ने इसे थोपा है, तो उन्होंने जवाब दिया, "मैंने पहले भी कई सवालों के जवाब दिए हैं। आज, मुझे बस इतना कहना है कि मैं इस मुकाबले से हट गया हूँ। फलता के लोगों की खातिर, फलता के विकास के लिए, फलता में शांति बनाए रखने के लिए।" यह ताजा घटनाक्रम लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि यह चुनाव क्षेत्र डायमंड हार्बर में आता है, जो अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र है। बता दें कि बंगाल की राजनीति खासकर इस इलाके में जहांगीर खान की तूती बोलती रही है। करीब 15 साल से फलता TMC का गढ़ बना हुआ था लेकिन बदले राजनीतिक हालात में उसके उम्मीदवार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के देवांग्शु पांडा से था।
इनसाइड स्टोरी क्या?
दरअसल, राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने देवांग्शु पांडा के समर्थन में वहां एक बड़ी रैली की और सीधे जहांगीर खान पर निशाना साधा। CM शुभेंदु ने उन्हें सरेआम चेतावनी भी दी और कहा, खुद को पुष्पा कहता है, अब इस 'पुष्पा' की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बिना किसी खौफ के मतदान कीजिए और बीजेपी को एक लाख से अधिक वोटों से जिताइए। बता दें कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होते ही सियासी समीकरण और हालात भी बदल गए हैं। फलता निर्वाचन क्षेत्र में भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। उनके समर्थकों में अंदर ही अंदर एक तरह का खौफ सता रहा है। माना जा रहा है कि फलता में सीधे मुख्यमंत्री की एंट्री ने सारे चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। ऐसे में जहांगीर खान जो पहले से पुलिस के निशाने पर हैं, ने इस चुनावी खेल से खुद को अलग करना ही बेहतर विकल्प के तौर पर देखा।




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