Why Himanta Sarma known as Mama in Assam massive popularity on the ground swore as CM हिमंत सरमा को क्यों ‘मामा’ पुकारने लगे लोग, जमीन पर गजब की लोकप्रियता; अब दूसरी बार बने असम के CM, India News in Hindi - Hindustan
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हिमंत सरमा को क्यों ‘मामा’ पुकारने लगे लोग, जमीन पर गजब की लोकप्रियता; अब दूसरी बार बने असम के CM

2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा को असम के साथ पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। क्यों कहा जाता है उन्हें ‘मामा’?

Tue, 12 May 2026 12:36 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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हिमंत सरमा को क्यों ‘मामा’ पुकारने लगे लोग, जमीन पर गजब की लोकप्रियता; अब दूसरी बार बने असम के CM

Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्य में NDA को प्रचंड जीत दिलवाने के बाद उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। इससे पहले हिमंत ने जालुकबाड़ी सीट पर 89 हजारों वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की थी। राज्य में उनकी लोकप्रियता इस हद तक है कि यहां का बच्चा-बच्चा उन्हें ‘मामा’ कहकर पुकारता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्हें यह नाम मिला कैसे?

2015 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद हिमंत को असम और पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है। 2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद 57 वर्षीय हिमंत ने अपनी छवि एक ऐसे नेता के रूप में बनाई है जो आम लोगों के लिए काम करता है और कल्याणकारी योजनाएं लागू करने पर जोर देता है। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल के साथ मिलकर 2016 में असम में पार्टी की पहली सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस दौरान राज्य में वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोक निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले और 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इस बीच उनकी लोक लुभावन नीतियां इतनी सफल हो गईं कि यहां के लोग उन्हें मामा कह कर पुकारने लगे।

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कैसे मिला यह नाम?

हिमंत बिस्वा सरमा को यह नाम यूं ही नहीं मिल गया। इस निक नेम की शुरुआत क्लासरूम से हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआत में असम के माजुली इलाके के कुछ बच्चों ने उन्हें मामा कहकर पुकारना शुरू किया। यह नाम धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैल गया। दरअसल इससे जुड़ा एक वाकया भी प्रसिद्ध है। सर्बानंद सोनोवाल के कार्यकाल में जब वह शिक्षा मंत्री थे तब असम में स्कूली बच्चियों को साइकिल बांटा गया था। इसके बाद वहां के लड़कों ने भी CM से मांग की कि उन्हें भी साइकिल दी जानी चाहिए।

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2021 में एक चुनावी रैली में उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि आप क्या आपको भी साइकिल चाहिए। इस पर बच्चों ने हां में जवाब दिया। इसके बाद हिमंत जहां भी रैली में जाते, बच्चे उनसे पूछते- “मामा हमें साइकिल कब मिलेगी?” इस तरह धीरे-धीरे यह नाम प्रचलित होने लगा। स्कूली बच्चियों के उन्हें गले लगाने और 'मामा' कहकर पुकारने के वीडियो क्लिप्स बड़े पैमाने पर वायरल हुए। इसके बाद सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे। वहीं असम में "मामा की गारंटी" जैसे नारे भी खूब चले।

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बन गई छवि

इस नाम के प्रसिद्ध होने का एक और कारण है। हिमंत बिस्वा सरमा खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करते हैं जो लोगों से सीधे जुड़ता है, उनकी समस्याएं सुनता है और जल्दी समाधान देने की कोशिश करता है। कई मौकों पर उन्हें जनता के बीच बिना औपचारिकता के बातचीत करते हुए देखा गया है, जिससे लोगों को उनके साथ एक पारिवारिक जुड़ाव महसूस होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘मामा’ की छवि ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है। इससे उनकी इमेज एक सख्त प्रशासक के साथ-साथ एक ऐसे नेता की भी बनी है जो लोगों के करीब है और उनकी भाषा में उनसे बात करता है।

अम्मा, दीदी और बहनजी को भी मिला लोगों का प्यार

भारतीय राजनीति में 'अम्मा', 'दीदी' और 'दादा' जैसे निकनेम बेहद प्रचलित रहे हैं। समर्थक अक्सर अपने नेताओं के प्रति प्यार, सम्मान और जुड़ाव दिखाने के लिए उन्हें ऐसे नाम से पुकारते हैं। इस लिस्ट में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK की दिग्गज नेता जयललिता, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के डिप्टी CM रहे अजित पवार जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं। जहां जयललिता के समर्थक उन्हें प्यार से 'अम्मा' कहते थे, वहीं ममता बनर्जी को लोग ‘दीदी’ के नाम से जानते हैं। महाराष्ट्र में अजित पवार को लोग सम्मान से ‘दादा’ के नाम से पुकारते थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती को भी ‘बहनजी’ का उपनाम मिला है।