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केरल में इतिहास रचने के करीब कांग्रेस, बहुमत मिला को कौन बनेगा सीएम? घमासान तय

केरल चुनाव रुझानों में कांग्रेस नीत UDF को प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है, जबकि LDF को बड़ा झटका लगा है। सत्ता में वापसी के बाद कांग्रेस में कौन बनेगा CM? जानिए रेस में आगे चल रहे 4 बड़े दावेदारों के नाम।

Mon, 4 May 2026 10:29 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तिरुवनंतपुरम
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केरल में इतिहास रचने के करीब कांग्रेस, बहुमत मिला को कौन बनेगा सीएम? घमासान तय

केरल विधानसभा चुनाव के ताजा रुझानों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। वामपंथी किले में सेंध लगाते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) ने जबरदस्त बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस (INC) अकेले 50 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि सत्ताधारी सीपीआई (एम) महज 31 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अगर ये रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं, तो केरल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन तय है। लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है- अगर कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलता है, तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा?

कांग्रेस की ओर से सीएम पद की रेस में शामिल नेता

केरल में अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) को स्पष्ट बहुमत मिलता है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। केरल कांग्रेस में कई गुट और कद्दावर नेता मौजूद हैं, जो इस शीर्ष पद के प्रबल दावेदार हैं।

वी.डी. सतीशन: वर्तमान में वह केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 2021 की चुनावी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके बाद से वह वामपंथी सरकार के खिलाफ पार्टी के सबसे आक्रामक चेहरे के रूप में उभरे हैं। इस चुनाव में वह पारवूर सीट से अपनी उम्मीदवारी पेश कर रहे हैं।

के.सी. वेणुगोपाल: हालांकि वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं और वर्तमान में AICC के महासचिव (संगठन) हैं, लेकिन गांधी परिवार के बेहद करीबी और भरोसेमंद होने के कारण, अप्रत्याशित परिस्थितियों में हाईकमान उनके नाम पर भी विचार कर सकता है। ऐसा कहा जाता है कि वेणुगोपाल सीएम बनने की इच्छा रखते हैं।

रमेश चेन्निथला: पूर्व नेता प्रतिपक्ष और केरल के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक चेन्निथला इस पद के सबसे मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग काफी तेज है और के. सुधाकरन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी खुले तौर पर यह मांग की है कि यूडीएफ के सत्ता में आने पर चेन्निथला को ही सीएम बनना चाहिए। वह इस बार हरिपाद सीट से मैदान में हैं।

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के. सुधाकरन: वर्तमान में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष होने के नाते के. सुधाकरन का नाम स्वाभाविक तौर पर इस सूची में शामिल है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और संगठन पर उनकी गहरी पकड़ है। वह पहले पेरावूर विधानसभा सीट से लड़ सीपीआई(एम) की कद्दावर नेता के.के. शैलजा के खिलाफ लड़ रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया।

शशि थरूर: तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर को अक्सर मुख्यमंत्री पद की चर्चाओं में एक संभावित और लोकप्रिय चेहरे के रूप में देखा जाता है। उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान, साथ ही युवाओं और मध्यम वर्ग के बीच उनकी स्वीकार्यता उन्हें एक मजबूत 'वाइल्ड कार्ड' उम्मीदवार बनाती है।

कांग्रेस में घमासान तय?

कांग्रेस के लिए यह जीत जितनी मीठी होगी, जीत के बाद की राह उतनी ही चुनौतीपूर्ण हो सकती है। केरल कांग्रेस में हमेशा से कई कद्दावर नेता और अलग-अलग गुट रहे हैं। सत्ता में वापसी की स्थिति में मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के भीतर भारी रस्साकशी होना लगभग तय है।

पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से लेकर राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ नेता इस रेस में अपनी दावेदारी पेश करेंगे। गुटबाजी को साधते हुए किसी एक सर्वमान्य चेहरे पर मुहर लगाना कांग्रेस आलाकमान के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी। अगर नेतृत्व इस मसले को सुलझाने में देरी करता है या किसी एक गुट की अनदेखी होती है, तो यह पार्टी के भीतर असंतोष को जन्म दे सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं। अगर कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा पार कर लेती है, तो असली राजनीतिक नाटक दिल्ली से लेकर तिरुवनंतपुरम तक देखने को मिलेगा।

ताजा आंकड़ों की तस्वीर: UDF की लहर, LDF को झटका

कांग्रेस की जोरदार वापसी: इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) 50 सीटों पर लीड कर रही है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर का कांग्रेस ने बखूबी फायदा उठाया है और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है।

IUML का मजबूत प्रदर्शन: कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी 20 सीटों पर आगे है। कांग्रेस और IUML के ही रुझान मिला दिए जाएं (70 सीटें), तो गठबंधन बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाता है।

लेफ्ट (LDF) बैकफुट पर: सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) - CPI(M) केवल 31 सीटों पर आगे है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) 14 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह वामपंथी गठबंधन के लिए एक बड़ा चुनावी झटका है।

बीजेपी (BJP) की उम्मीदें: भारतीय जनता पार्टी (BJP) 3 सीटों पर लीड कर रही है। केरल जैसे राज्य में जहां द्विध्रुवीय राजनीति हावी रही है, वहां 3 सीटों पर बढ़त बनाए रखना बीजेपी के लिए एक अहम कदम है।

क्षेत्रीय दलों का हाल: केरल कांग्रेस (KEC) 5, केरल कांग्रेस (M) 3 और रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) 3 सीटों पर आगे है। इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल (RJD), RMPOI, ISJD, केरल कांग्रेस (जैकब) और CMPKSC एक-एक सीट पर बढ़त बनाए हुए हैं।