कौन हैं BJP के देबांग्शु पांडा, जिन्होंने जहांगीर खान को हराया; फलता से पुष्पा का गेम ओवर
Who is Debangshu Panda, Falta Result: देबांग्शु पांडा भाजपा के फलता विधानसभा सीट से उम्मीदवार थे। 46 वर्षीय देबांग्शु पेशे से वकील हैं और भगवा दल के कार्यकर्ता हैं। माय नेता वेबसाइट के अनुसार, देबांग्शु के पास करीब दो करोड़ की संपत्ति है।

Who is Debangshu Panda, Falta Bengal Result: पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की है। उन्होंने फलता के पुष्पा कहे जाने वाले जहांगीर खान का गेम ओवर कर दिया। जहांगीर ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी नेता माने जाते हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फलता सीट पर भाजपा ने धांधली के आरोप लगाए थे। कई बूथों पर ईवीएम पर भाजपा चुनाव चिह्र के सामने टेप लगाकर छिपा दिया गया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 21 मई को फिर से मतदान करने का आदेश दिया था। 24 मई को आए नतीजों में देबांग्शु पांडा ने करीबी उम्मीदवार को 109021 वोटों पराजित किया।
कौन हैं भाजपा के देबांग्शु, जिन्होंने जहांगीर को हराया
देबांग्शु पांडा भाजपा के फलता विधानसभा सीट से उम्मीदवार थे। 46 वर्षीय देबांग्शु पेशे से वकील हैं और भगवा दल के कार्यकर्ता हैं। माय नेता वेबसाइट के अनुसार, देबांग्शु के पास करीब दो करोड़ की संपत्ति है। उनकी कुल संपत्ति एक करोड़ 90 लाख से अधिक है। हालांकि, उन पर 12 लाख का कर्ज भी है। 17 क्रिमिनल केसेज भी उन पर दर्ज हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो देबांग्शु ग्रेजुएट हैं और साल 2006 में उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री हासिल की है। उनके पास गाड़ियों में एक महिंद्रा स्कॉर्पियो एन है, जिसकी कीमत 10 लाख से अधिक है और बाइक में रॉयल एनफील्ड है, जिसे उन्होंने साल 2020 में 70 हजार रुपये में खरीदी।
फलता में कैसा रहा चुनावी नतीजा
चुनाव आयोग के आंकड़े के अनुसार, फलता में कुल 22 राउंड की गिनती हुई। शुरुआत से ही भाजपा के देबांग्शु ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली थी। वह कुल 149666 वोटों के साथ जीते, जबकि दूसरे नंबर पर सीपीआईएम के शंभु नाथ कुर्मी रहे, जिन्हें 40 हजार से ज्यादा वोट मिले। तीसरे नंबर पर कांग्रेस कैंडिडेट अब्दुर रज्जाक आए और उन्हें 10 हजार से ज्यादा वोट मिले। चौथे नंबर पर टीएमसी के जहांगीर खान रहे और साढ़े सात हजार से ज्यादा वोट हासिल किए। हालांकि, यहां खास बात यह भी है कि चुनावी मतदान से ठीक पहले जहांगीर ने पीछे हटने का ऐलान किया था। चूंकि, नामांकन वापस लेने की तारीख बीत गई थी, इसलिए ईवीएम से उनका नाम नहीं हट सका और वह टीएमसी कैंडिडेट के रूप में चुनावी मैदान में उतरे। जहांगीर के पीछे हटने के फैसले को टीएमसी ने उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया था।




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