क्या है रोमन कोलोसियम, मेलोनी संग जिसकी सैर पर निकले PM मोदी; क्यों खास है ये मुलाकात?
इससे पहले इटली पहुंचने पर पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत हुआ। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। वहीं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उन्हें अपना दोस्त कहकर भी संबोधित किया।

इटली दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें बुधवार को सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में वे इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी संग रोम की खूबसूरती निहारते नजर आ रहे हैं। मेलोनी ने यहां खुद पीएम मोदी का स्वागत किया और सोशल मीडिया पर सेल्फी शेयर कर उन्हें अपना दोस्त बताया। मेलोनी ने PM के लिए डिनर भी होस्ट किया। इसके बाद पीएम मोदी मेलोनी संग 'रोमन कोलोसियम’ पहुंचे जहां वे जगमगाती रोशनी में चमकते इस ऐतिहासिक इमारत की गलियारों में टहलते और गुफ्तगू करते नजर आए।
गौरतलब कि पीएम मोदी और मेलोनी के बीच की बेहतरीन बॉन्डिंग और व्यक्तिगत दोस्ती जगजाहिर है। ऐसे में दफ्तरों से इतर, कोलोसियम के ऐतिहासिक बैकड्रॉप में घूमना यह दिखाता है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं हैं। वहीं मेलोनी पीएम मोदी को जिस रोमन कोलोसियम की सैर कराने ले गईं, वह भी बेहद खास है।
क्या है रोमन कोलोसियम?
कोलोसियम इटली की राजधानी रोम में स्थित एक भव्य एम्फीथिएटर यानी एक खुला अखाड़ा है। 70-72 ईस्वी में फ्लेवियन वंश के सम्राट वेसपासियन ने इसकी नींव रखी और 80 ईस्वी में सम्राट टाइटस ने इसका उद्घाटन किया। इसे रोम की जनता को मनोरंजन के तोहफे के रूप में दिया गया था। इस अखाड़े में एक साथ 50,000 से अधिक लोग बैठ सकते थे। वहीं इसमें घुसने के लिए 80 दरवाजे थे, जिससे महज 10 मिनट में पूरा स्टेडियम खाली हो सकता था।
दुनिया के सात अजूबों में शामिल
रोमन साम्राज्य के समय यह कोलोसियम केवल एक इमारत नहीं, बल्कि रोमन संस्कृति और उनके मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र था। यहां योद्धाओं और गुलामों के बीच होने वाले खूनी मुकाबले होते थे, जो काफी प्रसिद्ध था। इसके अलावा यहां इंसानों और खूंखार जंगली जानवरों के बीच भी लड़ाई होती थी। यहां प्रसिद्ध पौराणिक नाटकों का मंचन भी होता था। यह प्राचीन वास्तुकला और रोमन इंजीनियरिंग के सबसे खूबसूरत नमूनों में से एक है। यही वजह है कि इसे दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया गया है और यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का भी हिस्सा है।
'कोलोसियम वॉक' क्यों है अहम?
पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की इस मुलाकात में कई संदेश छिपे हैं। जब दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष किसी दफ्तर की औपचारिक टेबल को छोड़कर किसी ऐतिहासिक धरोहर पर अनौपचारिक रूप मिलते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसके गहरे मायने होते हैं। जिस तरह भारत दुनिया की सबसे पुरानी और जीवंत सभ्यताओं में से एक है, ठीक वैसे ही रोमन साम्राज्य यूरोप की सबसे प्रभावशाली प्राचीन सभ्यता रहा है। दो प्राचीन सांस्कृतिक महाशक्तियों के नेताओं का यहां मिलना एक बड़ा सांस्कृतिक संदेश देता है। वहीं यह मुलाकात भारत-इटली के बीच मजबूत होते रणनीतिक और व्यक्तिगत रिश्तों को भी दर्शाती है।




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