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भारत-US की दोस्ती बढ़ा सकती है चीन की चिंता, क्वाड से कितना अलग है पैक्स सिलिका गठबंधन?

पैक्स सिलिका सहयोगी देशों के बीच एआई और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए प्रमुख गठजोड़ है। इसकी शुरुआत पिछले साल 12 दिसंबर को वॉशिंगटन में एक सम्मेलन के दौरान हुई थी।

Sat, 21 Feb 2026 05:48 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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भारत-US की दोस्ती बढ़ा सकती है चीन की चिंता, क्वाड से कितना अलग है पैक्स सिलिका गठबंधन?

नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में शुक्रवार को भारत ने ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही अमेरिका के इस महत्वपूर्ण रणनीतिक गठबंधन में सदस्य देशों की संख्या अब 10 हो गई है। जानकारों का कहना है कि 'क्वाड' के बाद यह नया गठबंधन चीन की चिंताएं बढ़ा सकता है, क्योंकि अब तक उसका इस क्षेत्र में प्रभुत्व रहा है।

पैक्स सिलिका गठबंधन क्या है?

पैक्स सिलिका सहयोगी देशों के बीच एआई और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए प्रमुख गठजोड़ है। इसकी शुरुआत पिछले साल 12 दिसंबर को वॉशिंगटन में एक सम्मेलन के दौरान हुई थी। यह समझौता सहयोगी देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा सहमति को आगे बढ़ाता है। यहां पैक्स शब्द का अर्थ है- शांति, स्थिरता और समृद्धि। अमेरिका में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग ने कहा कि 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील से चलती थी। लेकिन 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर से चलती है, और उस कंप्यूटर को बनाने के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज जरूरी हैं। पैक्स सिलिका का मकसद भरोसेमंद देशों के साथ एक साझा योजना बनाना है, ताकि वे भविष्य की एआई और तकनीक तैयार कर सकें। इसमें ऊर्जा, जरूरी खनिज, हाईटेक फैक्ट्री और एआई मॉडल, सब शामिल हैं।

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क्या है साझा घोषणा?

पैक्स सिलिका की घोषणा में कहा गया है कि हम साझा समृद्धि, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। हम मानते हैं कि भरोसेमंद सप्लाई चेन और सुरक्षित एआई सिस्टम भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं। एआई की तेज प्रगति वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को बदल रही है और इससे ऊर्जा, जरूरी खनिज, मैन्युफैक्चरिंग, हार्डवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों में बड़े अवसर बनेंगे।

पैक्स सिलिका में शामिल देश

इस समझौते पर भारत से पहले हस्ताक्षर करने वाले देश में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूके शामिल हैं। हस्ताक्षर किए बना जुड़े देशों में कनाडा, यूरोपीयन संघ, नीदरलैंड, आर्थिक सहयोगिता और विकास के लिए संगठन (ओईसीडी) और ताइवान शामिल हैं।

पैक्स सिलिका का मकसद

पैक्स सिलिका का सबसे बड़ा मकसद किसी एक देश पर पूरी तरह से निर्भरता को कम करना है। इसका मतलब है कि देश किसी एक देश पर सामग्री, तकनीक या उत्पादों के लिए जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहें, ताकि वैश्विक व्यापार में उन पर दबाव या उनका शोषण न किया जा सके। बिना नाम लिए यह गठजोड़ चीन की चुनौती को काउंटर करने की कोशिश है और खास तौर से रेयर अर्थ मेटल्स के सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की बड़ी दीर्घकालिक योजना है।

60-70 फीसदी चीन का प्रभुत्व

दुर्लभ खनिज धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं। आज के तकनीक के जमाने में दुर्लभ खनिज ऐसा फैक्टर है जिससे नियंत्रण अपने हाथों में बनाए रखा जा सकता है। हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण में हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं। अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है। दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है।

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