क्या है पैक्स सिलिका समूह? जिसमें भारत के न होने पर भड़की कांग्रेस, पीएम मोदी पर तंज
अमेरिका की तरफ से बनाए गए पैक्स सिलिका समूह में भारत को बाहर रखे जाने पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर तंज कसा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि पीएम मोदी और उनके दोस्त ट्रंप के बीच के बिगड़ते रिश्तों की वजह से ऐसा होने पर कोई आश्चर्य नहीं है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ एक 'पैक्स सिलिका' नामक समझौता किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब वैश्विक सप्लाई चैन पर दबदबा रखने वाला चीन इस क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। अमेरिका की तरफ से आगे बढ़ाए गए इस समझौते में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और इजरायल के साथ किया है। इस समझौते में भारत के शामिल न होने पर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबंधों में आई ‘‘तेज गिरावट’’ को देखते हुए यह बहुत आश्चर्यजनक नहीं लगता है कि भारत एक सुरक्षित सिलिकॉन आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल का हिस्सा नहीं है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत के इस समूह का हिस्सा नहीं होने की यह खबर ऐसे समय में आई है, जब प्रधानमंत्री ने ‘‘अपने कभी अच्छे मित्र रहे तथा अहमदाबाद, ह्यूस्टन और वाशिंगटन डीसी में कई बार गले मिल चुके’’ ट्रंप से हुई फोन कॉल के बारे में सोशल मीडिया पर उत्साह से जानकारी साझा की थी।
कांग्रेस महासचिव ने लिखा,"कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने एआई और हाई टेक्नोलॉजी वाली सप्लाई चैन पर चीन के नियंत्रण कम करने के लिए नौ-देशों के साथ मिलकर एक समझौता किया है। उन्होंने भारत को इससे बाहर रखा है। इस समझौते को ‘पैक्स सिलिका’ कहा जाता है, जो स्पष्ट रूप से ‘पैक्स सिनिका’ का जवाब है। इसमें शामिल राष्ट्र (कम से कम अभी के लिए) अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया हैं।’’
उन्होंने कहा, "10 मई, 2025 के बाद से ट्रंप-मोदी संबंधों में आई तीव्र गिरावट को देखते हुए यह शायद आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया। अगर हम इस समूह का हिस्सा होते तो निःसंदे यह हमारे लिए फायदेमंद होता। यह खबर प्रधानमंत्री द्वारा अपने उस पुराने मित्र के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत के बारे में उत्साहपूर्वक (सोशल मीडिया) पोस्ट करने के एक दिन बाद आई है, जिसे वह अहमदाबाद, ह्यूस्टन और वाशिंगटन डीसी में कई बार गले लगा चुके हैं।’’
आपको बता दें, अमेरिका विदेश मंत्रालय के अनुसार,‘पैक्स सिलिका’ नामक इस पहल का उद्देश्य सप्लाई चैन पर किसी भी तरह के दबाव को कम करना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लिए मूलभूत सामग्री और क्षमताओं की रक्षा करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि सहयोगी राष्ट्र बड़े पैमाने पर परिवर्तनकारी टेक्नोलॉजी का विकास और तैनाती कर सकें।
इस पहल में जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। भारत को छोड़कर अन्य सभी क्वाड देश जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस नई पहल का हिस्सा हैं। अमेरिका की तरफ से कहा गया कि भविष्य में इसमें और भी सहयोगी देश शामिल होंगे।




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