What is House File 2513 that seeks to change H1-B Visas rules in US what impact on Indians and other foreigners क्या है हाउस फाइल 2513? जो अमेरिकी H1-B वीजा को करेगा कुंद; नई भर्ती पर बैन, भारतीयों पर क्या असर, India News in Hindi - Hindustan
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क्या है हाउस फाइल 2513? जो अमेरिकी H1-B वीजा को करेगा कुंद; नई भर्ती पर बैन, भारतीयों पर क्या असर

इस बिल के समर्थकों का कहना है कि जोखिमों को कम करने और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के लिए यह बिल जरूरी है। उनके मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य संवेदनशील अनुसंधान को जासूसी या बौद्धिक संपदा की चोरी से बचाना है।  

Tue, 14 April 2026 04:33 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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क्या है हाउस फाइल 2513? जो अमेरिकी H1-B वीजा को करेगा कुंद; नई भर्ती पर बैन, भारतीयों पर क्या असर

अमेरिकी राज्य आयोवा एक ऐसा कानून बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें चुनिंदा विदेशियों को काम पर रखने से प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है। यह कानून विश्वविद्यालयों द्वारा विदेशी कर्मचारियों, खासकर H-1B वीज़ा धारकों को नौकरी पर रखने के तरीके को बदल सकता है। इस बिल को 'House File 2513' नाम दिया गया है। यह बिल आयोवा हाउस से पहले ही पास हो चुका है और सीनेट में भी शुरुआती चरण पार कर चुका है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो उच्च शिक्षा संस्थानों में कुछ खास विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखने पर नई पाबंदियां लग सकती हैं।

न्यूज वीक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के कई राज्य H-1B वीजा के इस्तेमाल की समीक्षा कर रहे हैं और अधिक से अधिक स्थानीय कर्मचारियों को नौकरी पर रखना चाह रहे हैं। ऐसे में इस बिल पर बहस छिड़ गई है; इसके समर्थक जहां देश की सुरक्षा और नौकरियों से जुड़ी चिंताओं का हवाला दे रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे प्रतिभा और निष्पक्षता पर बुरा असर पड़ सकता है।

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क्या है हाउस फाइल 2513?

हाउस फाइल 2513 एक राज्य स्तरीय प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों (Universities/Colleges) को कुछ विदेशी नागरिकों को नौकरी देने से रोकना है। इस कानून में प्रस्ताव किया गया है कि कानून आयोवा राज्य में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 'विदेशी दुश्मनों' (चीन, रूस, ईरान, आदि) वाले देशों के नागरिकों को H-1B वीजा पर नियुक्त करने से रोकेगा। यह विधेयक 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होने का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान की सुरक्षा करना है। यह बिल पहले ही राज्य के सदन आयोवा हाउस में 68-27 वोटों से पास हो चुका है और अब सीनेट में आगे की मंजूरी का इंतजार कर रहा।

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बिल के मुख्य प्रावधान, भारतीयों पर क्या असर?

इस प्रस्ताव के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों, कम्युनिटी कॉलेजों और कुछ निजी संस्थानों को यह छूट देता है कि वे H-1B वीजा धारकों को नई नौकरी नहीं दें। खासकर उन लोगों को जो ऐसे देश के नागरिक हैं जिन्हें अमेरिका ने 'विदेशी विरोधी' या 'आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश' की सूची में डाल रखा है। इन देशों में चीन, रूस, ईरान, उत्तर कोरिया, क्यूबा, ​​सीरिया और वेनेज़ुएला शामिल हैं। अमेरिकी सरकार ने इन देशों को 'विदेशी विरोधी' या 'आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश' की सूची में डाल रखा है। समर्थकों का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य संवेदनशील अनुसंधान को जासूसी या बौद्धिक संपदा की चोरी से बचाना है। बहरहाल, इस लिस्ट में भारत का नाम नहीं है, इसलिए H-1B वीजा प्राप्त भारतीय पेशेवरों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता दिख रहा है।

H-1B वीजा क्या होता है?

बता दें कि H-1B वीजा एक ऐसा वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों और संस्थानों को विदेशी विशेषज्ञों (IT, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर आदि) को नौकरी देने की अनुमति देता है। इस वीजा कार्यक्रम का इस्तेमाल उन कंपनियों और लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है जो टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य सेवा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं। यह वीज़ा भले ही कुछ समय के लिए (अस्थायी) होता है, लेकिन इसके ज़रिए स्थायी नागरिकता भी मिल सकती है। इस बिल के समर्थकों का कहना है कि जोखिमों को कम करने और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के लिए यह बिल ज़रूरी है। आयोवा के एक कानून निर्माता, टेलर कॉलिन्स ने कहा कि जासूसी और नौकरियों के अवसरों से जुड़ी चिंताओं के कारण ही यह प्रस्ताव लाया गया है।

हालांकि, इस बिल को शिक्षाविदों और विभिन्न संगठनों की आलोचना का भी सामना करना पड़ा है। कुछ लोगों का तर्क है कि यह लोगों को उनके कौशल के बजाय उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर अनुचित रूप से निशाना बनाता है। वहीं, अन्य लोग चेतावनी देते हैं कि इससे कानूनी चुनौतियाँ खड़ी हो सकती हैं और वैश्विक प्रतिभा तक पहुँच को सीमित करके विश्वविद्यालयों को नुकसान पहुँच सकता है।