कांटों का ताज पहनने जा रहे विजय? सरकार बनते ही इन चुनौतियों का करना होगा सामना
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने के बाद टीवीके चीफ विजय आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। हालांकि उनके लिए सरकार बनाने के बाद भी रास्ता आसान नहीं है। उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कषगम (TVK) को सरकार बनाने क लिए काफी पापड़ बेलने पड़े। टीवीके अपने पहले विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाई थी। तकनीकी रूप से श्री विजय के पास 107 विधायक माने जा रहे थे क्योंकि उन्होंने खुद दो सीटों से जीत दर्ज की है। इस तरह बहुमत के लिए उन्हें 10 और विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।
पांच विधायकों वाली कांग्रेस ने उन्हें तुरंत समर्थन देने का ऐलान कर दिया था, जिसके बाद विजय राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था, लेकिन राज्यपाल ने उन्हें बहुमत के लिए जरूरी 117 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपने को कहा था। इसके बाद दो-दो विधायकों वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी उन्हें समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यपाल इससे भी संतुष्ट नहीं हुए। दो-दो विधायकों वाले विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के शनिवार को समर्थन देने की घोषणा के बाद विजय चौथी बार लोकभवन गये और राज्यपाल ने उन्हें मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया।
टीवीके प्रमुख रविवार सुबह 10 बजे चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और राज्यपाल के निर्देश के अनुरूप उन्हें 13 मई तक विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना होगा। श्री विजय के साथ कुछ अन्य मंत्रियों के भी शपथ ग्रहण करने की संभावना है। संभावित मंत्रियों में टीवीके महासचिव 'बुसी' एन आनंद, आधव अर्जुना, पूर्व अन्नाद्रमुक मंत्री केए सेंगोट्टायन और पूर्व आईआरएस अधिकारी अरुण राज शामिल हैं। कांग्रेस की ओर से थरगई काउथबर्ट और पी. विश्वनाथन के मंत्री बनने की संभावना है।
क्या हैं विजय की चुनौतियां
विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती तमिलनाडु को एक स्थायी सरकार देना है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ सरकार बनाने के बाद गठबंधन में सब कुछ ठीकठाक रखना विजय की जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा उन्हें मंत्रिपद भी उसी हिसाब से बांटने होंगे। इसके अलावा उनके सामने जनता का विश्वास जीतने की भी चुनौती है। एमजी रामचंद्रन और जे जयललिता को आदर्श मानने वाली तमिलनाडु की जनता के सामने विजय को खुद को हीरो साबित करना होगा।
विजय के सामने एक मजबूत प्रशासनिक टीम बनाने की भी चुनौती है जिससे कि तमिलनाडु में विकास के कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। इसके अलावा डीएमके एक मजबूत विपक्ष और ऐसे में उसे भी साधना विजय के सामने चुनौती होगी। राज्य में आर्थिक और रोजगार का बड़ा दबाव है और ऐसे में उन्हें इस मोर्चे पर काम करना होगा। इसके अलावा फैनबेस और जनता की उम्मीदों में काफी अंतर होता है। अभी तक लोग विजय को अभिनेता के तौर पर देखते थे लेकिन अब मुख्यमंत्री के तौर पर उनसे काफी उम्मीदें होंगी जिनपर उन्हें खरा उतरने होगा।
केंद्र से संबंध
विकास कार्यों और राज्य में अन्य कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए विजय को केंद्र के साथ भी अच्छे समीकरण बनाने होंगे। इसके अलावा राज्य में कानून व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा से निपटना भी ऐक्टर विजय के सामने बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।




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