TVK के साथ जाने वाले बाकी साथियों को स्टालिन का 'थैंक्यू', लेकिन कांग्रेस पर तीखा प्रहार
तमिलनाडु विधानसभा में विजय थलापति को बहुमत मिलने के बाद स्टालिन ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डीएमके प्रमुख ने टीवीके को समर्थन देने वाले अन्य साथी दलों को नीतिगत आधार पर डीएमके का साथ देने के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन कांग्रेस के ऊपर धोखा देने का आरोप लगाया।

Tamilnadu news: तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। तमिलझा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ विजय को बहुमत हासिल हो गया है। लेकिन अब बाकी पार्टियों के ऊपर इसका असर दिख रहा है। टीवीके को समर्थन देने वाली ज्यादातर पार्टियां डीएमके की सहयोगी रही हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की तरफ से इन पार्टियों को लेकर बयान सामने आया है। स्टालिन ने वाम दलों, विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) समेत अन्य दलों को नीतिगत स्थिति में द्रमुख को समर्थन जारी रखने के लिए धन्यवाद दिया। लेकिन ने स्टालिन ने कांग्रेस के ऊपर धोखा देने का आरोप लगाया।
शनिवार को विजय की पार्टी को बहुमत हासिल होने के ऐलान के तुरंत बाद डीएमके प्रमुख ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। पोस्ट में उन्होंने सबसे पहले कांग्रेस के अलावा बाकी सहयोगियों को नीतिगत आधार पर समर्थन जारी रखने के लिए धन्यवाद दिया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के ऊपर धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (SPA) के साथ धोखा करने का आरोप लगाया। स्टालिन के मुताबिक, कांग्रेस जिन विधायकों के साथ विजय की पार्टी को समर्थन देने के लिए पहुंची हैृ, वह उनके ही एसपीए गठबंधन के झंड़े के नीचे जीतकर आए हैं, लेकिन इसके बाद भी वह उनसे मिलने के लिए डीएमके के मुख्यालय तक नहीं आए।
स्टालिन का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
स्टालिन ने लिखा, "गठबंधन की ओर से चुनाव लड़कर जीतने वाले कांग्रेस विधायक धन्यवाद व्यक्त करने के लिए भी अन्ना अरिवालयम नहीं आए। उसी दिन कांग्रेस पार्टी ने डीएमके से अपने संबंधों को खत्म कर लिया और आगे बढ़ गई। दूसरी ओर, कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड शन्मुगम और कॉमरेड वीरपांडियन, साथ ही विदुथलाई चिरुथैगल काची के नेता थिरुमावलवन ने घोषणा की है कि वह तमिलनाडु के अधिकारों और जनता के कल्याण के लिए डीएमके के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेंगे। इससे उन्होंने भाईचारे की भावना व्यक्त की है।"
थलापति विजय के साथ कांग्रेस
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पहले थलापति विजय और उनकी पार्टी ने कांग्रेस को गठबंधन के लिए आमंत्रित किया था। उस वक्त कांग्रेस ने अपने दशकों पुराने साथी द्रमुक पर भरोसा जताते हुए उसी के साथ चुनाव में जाने का फैसला किया था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद स्थिति तेजी के साथ बदल गई। विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद कांग्रेस ने तुरंत ही विजय के साथ जाने का फैसला कर लिया। डीएमके इससे काफी नाराज हुई। दशकों तक केंद्र और राज्य की राजनीति में साथ रहने वाले दोनों दलों ने एक-दूसरे के ऊपर हमल करना शुरू कर दिया। यहां तक कि डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनके सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग बैठक व्यवस्था करने की अपील कर दी।
वर्तमान में भी दोनों दलों के बीच में खटास जारी है। एक तरफ कांग्रेस है, जो विजय की पार्टी के बाद तमिलनाडु के सत्ताधारी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होगी। दूसरी तरफ डीएमके है, जिसने एक वक्त के बाद तमिलनाडु की सत्ता गंवाई है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले पांच वर्ष दोनों पार्टियों के लिए किस तरह के बीतते हैं। क्योंकि डीएमके की तरफ से साफ कर दिया गया है कि कांग्रेस को इस धोखेबाजी का परिणाम 2029 के लोकसभा चुनावों में देखने को मिलेगा।




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