तेल संकट का बड़ा असर! किराना से लेकर दूध-दाल तक सब होगा महंगा? लोन, EMI और सैलरी पर सीधा असर, समझें गणित
oil crisis india; पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर आम लोगों की जेब पर भी देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने के साथ EMI, किराने का खर्च और कंपनियों की सैलरी ग्रोथ पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

oil crisis india; कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि इसका असर आम आदमी की जेब पर कई तरफ से पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी भी हलचल सीधे देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के रोजमर्रा के खर्च पर असर डालती है। आने वाले दिनों में इसका सबसे बड़ा असर आपकी EMI, किराने के बिल और सैलरी ग्रोथ पर देखने को मिल सकता है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
सबसे पहले बात करें पेट्रोल-डीजल की, तो सरकार अभी तक तेल कंपनियों के घाटे को संभालकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां रोज करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। लेकिन, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोगों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील कर चुके हैं।
लोन और EMI पर पड़ेगा सीधा असर
तेल महंगा होने का सीधा असर आपकी EMI पर भी पड़ सकता है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ती है और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकता है। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों ने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया हुआ है, उनकी EMI लंबे समय तक ज्यादा बनी रह सकती है। अगर ब्याज दरों में सिर्फ 0.25% से 0.50% तक की बढ़ोतरी होती है, तो 50 लाख रुपये के होम लोन पर हर महीने हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर इसका असर और जल्दी दिखाई देगा।
महंगा होगा सब्जी, दूध, दाल, चावल और पैकेज्ड फूड
अब बात किराने के बिल की करें तो डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ जाती है। भारत में ज्यादातर सामान ट्रकों के जरिए एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में सब्जियां, दूध, फल, दाल, चावल और पैकेज्ड फूड की कीमतें बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहा, तो खाद्य महंगाई RBI के तय दायरे से ऊपर जा सकती है। मध्यम वर्गीय परिवार, जो हर महीने 8,000 से 10,000 रुपये तक किराने पर खर्च करते हैं, उन्हें हर महीने 500 से 1,000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
असर नौकरी और सैलरी पर भी
इस तेल संकट का असर नौकरी और सैलरी पर भी दिख सकता है। बढ़ती ईंधन लागत से कंपनियों का खर्च बढ़ेगा, जिससे कई सेक्टर जैसे एविएशन, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव बढ़ सकता है। कंपनियां हायरिंग धीमी कर सकती हैं, सैलरी इंक्रीमेंट टाल सकती हैं या खर्च घटाने के लिए नए कदम उठा सकती हैं, यानी सीधे शब्दों में कहें तो तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में आम आदमी के बजट को कई तरफ से प्रभावित कर सकती हैं।




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