यूपी भाजपा में बड़े चेहरों की होगी एंट्री, आखिर जाति समीकरण से परे क्या सोच रही; जिसके चर्चे
सूत्रों का कहना है कि इन 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष के तौर पर भी भाजपा कद्दावर नेताओं को कमान दे सकती है। बता दें कि भाजपा ने यदि यूपी में जातीय समीकरण के नाम पर सफलता पाई है तो वहीं उसकी इलेक्शन मशीनरी भी अहमियत रखती है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार बीते सप्ताह हुआ है। विधानसभा चुनाव में एक साल का वक्त बचा है और अब उससे पहले पार्टी संगठन के पेच भी कस लेना चाहती है। ऐसा इसलिए ताकि चुनाव के दौरान मशीनरी कमजोर न रहे। 2014 से अब तक भाजपा ने यूपी में सभी चुनाव इलेक्शन मशीनरी यानी संगठन के दम पर ही जीते हैं। ऐसे में सरकार को मजबूत करने और सामाजिक समीकरण फिट करने के बाद भाजपा की नजर अब संगठन की ओर है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इसी महीने के अंत तक यूपी भाजपा में पदाधिकारी चुन लिए जाएंगे। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी फिलहाल इसी को लेकर मंथन में जुटे हैं।
इस बीच बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिल्ली जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन लोगों को संगठन में चांस मिलेगा। अब तक की जानकारी के मुताबिक भाजपा संगठन में ऐसे लोगों को मौका देना चाहती है, जिनका लंबा अनुभव है। ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो आरएसएस के बैकग्राउंड के हैं और उन्हें संगठन का आदमी कहा जाता है। भाजपा में संगठन का आदमी ऐसे लोगों को कहा जाता है, जो आरएसएस के बैकग्राउंड से आते हैं और विचार से लेकर पार्टी की रीति-नीति तक की अच्छी जानकारी रखते हों।
भाजपा के एक सीनियर लीडर ने कहा कि कम से कम 60 पदाधिकारी ऐसे होंगे, जो संगठन की समझ रखते हों। इन नियुक्तियों में जातीय संतुलन से ज्यादा संगठन की समझ को महत्व दिया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्रीय संतुलन को साधा जा सकता है। दरअसल कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने जातीय संतुलन का ध्यान रखा था। ज्यादातर ओबीसी और दलित वर्ग के नेताओं को ही तवज्जो मिली थी, लेकिन संगठन में ऐसा नहीं होगा। जातीय समीकरणों को परे रखते हुए भाजपा ऐसे लोगों को महत्व देगी, जो लंबे समय से संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।
भाजपा की 6 क्षेत्रीय यूनिट के अध्यक्ष भी होंगे कद्दावर नेता?
भाजपा के संगठन में राज्य स्तरीय इकाई के लिए 6 क्षेत्रीय यूनिट भी हैं। इनका गठन काशी, गोरखपुर, पश्चिम यूपी, अवध, ब्रज और कानपुर-बुंदेलखंड के नाम से किया गया है। आरएसएस भी यूपी के अंदर 6 प्रांत मानता है और उसी के अनुसार काम करता है। सूत्रों का कहना है कि इन 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष के तौर पर भी भाजपा कद्दावर नेताओं को कमान दे सकती है। बता दें कि भाजपा ने यदि यूपी में जातीय समीकरण के नाम पर सफलता पाई है तो वहीं उसकी इलेक्शन मशीनरी भी अहमियत रखती है। यही वजह है कि 2027 के चुनावी रण से पहले भाजपा चाहती है कि सारे पेच कस लिए जाएं ताकि कोई ढिलाई न रहे।




साइन इन