Unnao Rape Case Accused Kuldeep Singh Sengar daughter open letter after Supreme Court stays bail सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सेंगर की बेटी ने लगाई न्याय की गुहार, खुले पत्र में क्या-क्या लिखा?, India News in Hindi - Hindustan
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सेंगर की बेटी ने लगाई न्याय की गुहार, खुले पत्र में क्या-क्या लिखा?

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म मामले के दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगा दी गई थी और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश भी दिया गया था।

Mon, 29 Dec 2025 05:05 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब सेंगर की बेटी ने लगाई न्याय की गुहार, खुले पत्र में क्या-क्या लिखा?

Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CBI की अपील पर सुनवाई करते हुए उन्नाव रेप केस के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके बाद बाद पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर की बेटी ने एक सार्वजनिक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। सेंगर की बेटी इशिता सेंगर ने इस पत्र में कहा है कि इस ट्रायल की वजह से उसे और पूरे परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं और वह इन सब से थक चुकी हैं।

इशिता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस खत को साझा किया है। सेंगर की बेटी ने कहा कि वह इस खत को एक बेटी के तौर पर लिख रही है जो थक चुकी है, डरी हुई है, और धीरे-धीरे उम्मीद खो रही है। उसने यह सवाल भी उठाए कि लोग उन्हें ‘ताकतवर’ कहते हैं लेकिन यह कैसी ताकत है जो ‘एक परिवार को 8 साल तक बेजुबान बना देती है’।

सेंगर की बेटी ने क्या लिखा?

इशिता सेंगर ने आरोप लगाए हैं कि उनके परिवार की इज्जत छीन ली गई है। उन्होंने खत में लिखा, “मेरे शब्द सुने जाने से पहले ही, मेरी पहचान एक लेबल तक सीमित कर दी गई है, "एक बीजेपी विधायक की बेटी।"... इन सालों में सोशल मीडिया पर मुझे अनगिनत बार कहा गया है कि मेरा रेप किया जाना चाहिए, मार दिया जाना चाहिए, या सजा दी जानी चाहिए। यह रोज की बात है।” उसने आगे लिखा, “हमारी गरिमा को टुकड़ों-टुकड़ों में छीना गया है। आठ सालों से हर दिन हमारा अपमान किया गया है, मजाक उड़ाया गया है, और हमें इंसान नहीं समझा गया है। हम आर्थिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं।”

इशिता सेंगर ने लिखा कि वह यह चिट्ठी किसी को धमकी देने के लिए या सहानुभूति पाने के लिए यह चिट्ठी नहीं लिख रही हैं। उन्होंने लिखा, “मैं इसलिए लिख रही हूं क्योंकि मैं बहुत डरी हुई हूं और क्योंकि मुझे अब भी विश्वास है कि कोई, कहीं, मेरी बात सुनने की परवाह करेगा। हम कोई एहसान नहीं मांग रहे हैं। हम इसलिए सुरक्षा नहीं मांग रहे हैं कि हम कौन हैं। हम न्याय मांग रहे हैं क्योंकि हम इंसान हैं।”

सेंगर को SC से झटका

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की अवकाशकालीन पीठ ने की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि इस मामले में कानून के कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर जमानत पर रिहा हुए व्यक्ति को सुने बिना उसके आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती लेकिन इस मामले के तथ्य 'असाधारण' हैं। उच्चतम न्यायालय ने जवाब दाखिल करने के लिए सेंगर को चार सप्ताह का समय दिया है।

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बता दें कि कुलदीप सेंगर को दिसंबर 2019 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराया था और 25 लाख रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सेंगर ने जनवरी 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी और बाद में मार्च 2022 में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर के अपने आदेश में सेंगर की सजा पर रोक लगा दी और अपील के निपटारे तक कुछ शर्तों के अधीन सेंगर को जमानत दे दी।