Two Ministers Denied Rajya Sabha Tickets Speculation of Modi Cabinet Reshuffle Intensifies 2 मंत्रियों को नहीं मिला राज्यसभा का टिकट, मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज, India News in Hindi - Hindustan
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2 मंत्रियों को नहीं मिला राज्यसभा का टिकट, मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज

cabinet reshuffle: मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को इस बात से भी बल मिल रहा है कि दो अन्य जूनियर मंत्रियों को पहले ही संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

Fri, 5 June 2026 04:53 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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2 मंत्रियों को नहीं मिला राज्यसभा का टिकट, मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहट तेज

cabinet reshuffle: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 11 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। इस सूची के सामने आने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की चर्चा बेहद तेज हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को इस सूची में जगह नहीं मिली है।

जॉर्ज कुरियन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में इकलौते ईसाई मंत्री हैं जो मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। वहीं, रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। दोनों ही मंत्रियों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। लेकिन बीजेपी ने उन्हें उनके संबंधित राज्यों से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है।

मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव के संकेत

मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों को इस बात से भी बल मिल रहा है कि दो अन्य जूनियर मंत्रियों को पहले ही संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा चुकी हैं। पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली बीजेपी की कमान सौंपी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बिट्टू और कुरियन को संसद के ऊपरी सदन में नहीं भेजा जाता है तो उनके पास अपना मंत्री पद बरकरार रखने के लिए सीमित समय होगा। नियमानुसार, 21 जून को कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे अधिकतम 6 महीने तक मंत्री पद पर रह सकते हैं।

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इससे पहले साल 2022 में भी ऐसा ही वाकया देखा गया था, जब तत्कालीन कैबिनेट मंत्रियों मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और बाद में पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन में नहीं भेजा था।

बीजेपी का नो रिपीट फॉर्मूला

इस बार के राज्यसभा टिकट बंटवारे में बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने किसी भी निवर्तमान सांसद को दोबारा टिकट नहीं दिया है। टिकट कटने वाले प्रमुख नामों में गुजरात से रामभाई मोकारिया, अमीन नरहरि और रमीला बारा, राजस्थान से राजेंद्र गहलोत, मध्य प्रदेश से सुमेर सिंह सोलंकी, मणिपुर से लीशेम्बा सनाजाओबा और अरुणाचल प्रदेश से नबाम रेबिया शामिल हैं।

इसके विपरीत, पार्टी ने संगठन में लंबे समय से काम कर रहे पदाधिकारियों को तवज्जो दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को इस बार संसद में डेब्यू करने का मौका मिल सकता है। ओडिशा उपचुनाव के लिए देबाशीष सामंतराय को उम्मीदवार बनाया गया है, जो हाल ही में बीजू जनता दल (BJD) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।

अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग रणनीति

बीजेपी ने अपनी इस सूची में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने का पूरा प्रयास किया है। गुजरात से चार नए चेहरों को मौका दिया गया है, जिनमें राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से ओबीसी और आदिवासी समुदाय पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने जाट सिख केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है ताकि नए मतदाताओं को जोड़ा जा सके। वहीं, राज्यसभा के लिए तरुण चुघ को चुनकर पार्टी ने राज्य में अपने पारंपरिक मतदाता वर्ग को साधने की कोशिश की है।

पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू को टिकट न मिलने से राजनीतिक हलके हैरान हैं, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें आगामी पंजाब चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने को कह सकती है।

केरल से आने वाले वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन हाल ही में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव हार गए थे। वहीं राजस्थान में बीजेपी ने दो संख्या में मजबूत ओबीसी समुदायों को रिझाने के लिए नए चेहरों को आगे बढ़ाया है। मणिपुर से पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी और अरुणाचल प्रदेश से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताई तागाक को राज्यसभा का टिकट दिया गया है।

संगठनात्मक बदलाव भी तय

बीजेपी के भीतर यह फेरबदल केवल सरकार तक सीमित नहीं रहेगा। जनवरी में नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद से ही संगठन में भी बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है। नितिन नवीन लगातार राज्यों का दौरा कर फीडबैक ले रहे हैं और संगठन की मशीनरी को दुरुस्त करने में जुटे हैं।

संख्या बल के हिसाब से देखें तो इन राज्यों में बीजेपी की सरकारें होने के कारण वह गुजरात की 4, राजस्थान की 2, मध्य प्रदेश की 2, मणिपुर की 1 और अरुणाचल प्रदेश की 1 सीट समेत ओडिशा की उपचुनाव सीट पर आसानी से जीत दर्ज कर लेगी। हालांकि, बीजेपी ने अभी तक झारखंड और कर्नाटक से अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए हैं। इन दोनों ही राज्यों से एक-एक सीट मिलना तय है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी शायद इन दो सीटों में से किसी एक पर अपने बाकी बचे मंत्रियों को एडजस्ट करने का विकल्प खुला रख सकती है।