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तमिलनाडु की सियासत में 'सिंघम' की दहाड़ अभी बाकी है, गेम चेंजर बनेंगे अन्नामलाई?

बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी राज्य के आगामी उपचुनावों में अपनी ताकत आजमाएंगे?

Tue, 2 June 2026 03:43 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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तमिलनाडु की सियासत में 'सिंघम' की दहाड़ अभी बाकी है, गेम चेंजर बनेंगे अन्नामलाई?

बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई के राजनीतिक भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी राज्य के आगामी उपचुनावों में अपनी ताकत आजमाएंगे? तमिलनाडु विधानसभा की पांच सीटें वर्तमान में खाली हैं, जिससे जल्द ही उपचुनाव कराए जाने की संभावना प्रबल हो गई है। मुख्यमंत्री विजय के इस्तीफे के बाद त्रिची पूर्व सीट खाली हुई थी, जहां टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा, एआईएडीएमके के चार विधायकों ने हाल ही में इस्तीफा देकर विजय की पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया। सूत्रों का कहना है कि खाली सीटों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कुछ अन्य विधायक भी पाला बदलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।

इसी बीच अन्नामलाई खुद को बड़े राजनीतिक प्रोजेक्ट के लिए तैयार कर रहे हैं। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, इस साल के अंत में वे एक जन आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं, जिसका मुख्य फोकस युवा मतदाताओं, खासकर Gen-Z को जोड़ना है। इस आंदोलन को उनकी संभावित नई राजनीतिक पार्टी की नींव माना जा रहा है। हालांकि अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अन्नामलाई ने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत में समर्थकों से 'दो दिन इंतजार करने' की अपील की, जिससे नई पहल की अटकलें और बढ़ गई हैं।

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वहीं, अन्नामलाई का स्पष्ट मानना है कि तमिलनाडु में दशकों पुराना द्रविड़ियन राजनीतिक मॉडल अब कमजोर पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अब भाषा और जाति आधारित पारंपरिक राजनीति से आगे कुछ नया चाहती है। उनके करीबियों के मुताबिक, विजय के उभरने के बाद राज्य की राजनीति में मौलिक बदलाव आ गया है और 'द्रविड़ युग' का अंत हो चुका है। अब केवल भाषा के मुद्दों पर राजनीति नहीं चल सकती।

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दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषक इसे अन्नामलाई द्वारा विजय की बढ़ती लोकप्रियता को स्वीकार करने के रूप में देख रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या अन्नामलाई खुद को विजय के पूरक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं या फिर एक स्वतंत्र वैकल्पिक शक्ति के रूप में उभरना चाहते हैं। दक्षिण भारत में भाजपा के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल अन्नामलाई पार्टी की तमिलनाडु इकाई को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई चुनाव नहीं जीत सके हैं। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर मजबूत उपस्थिति, सत्ता-विरोधी छवि और राज्यव्यापी चर्चा को उनकी ताकत बताते हैं।

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अगर प्रदेश में उपचुनाव हुए तो यह अन्नामलाई के लिए महज सीट जीतने से कहीं बड़ा परीक्षण होगा। इससे साफ होगा कि क्या उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता भाजपा के बाहर भी वोटों में तब्दील हो सकती है और क्या द्रविड़ दलों व टीवीके के बीच तीसरी ताकत के रूप में उनकी नई पार्टी को जगह मिल पाएगी।