Tamil Nadu government warns of salary cuts if participants join nationwide strike काम नहीं तो वेतन नहीं, तमिलनाडु सरकार ने क्यों दी कर्मचारियों को चेतावनी?, India News in Hindi - Hindustan
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काम नहीं तो वेतन नहीं, तमिलनाडु सरकार ने क्यों दी कर्मचारियों को चेतावनी?

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम संहिताओं के विरोध में 12 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसके कारण बैंकिंग और अन्य जनसेवा क्षेत्रों पर असर पड़ने की संभावना है।

Wed, 11 Feb 2026 11:27 PMDevendra Kasyap वार्ता
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काम नहीं तो वेतन नहीं, तमिलनाडु सरकार ने क्यों दी कर्मचारियों को चेतावनी?

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम संहिताओं के विरोध में 12 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा गुरुवार को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इसके कारण बैंकिंग और अन्य जनसेवा क्षेत्रों पर असर पड़ने की संभावना है। हड़ताल के मद्देनजर कई राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी दफ्तर, बाजार और परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस आह्वान में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एक्टू, एलपीएफ, यूटीयूसी और एनएफआईटीयू-धनबाद सहित 12 संगठन शामिल हैं। किसान संगठनों ने भी समर्थन दिया है।

ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि केंद्र की नीतियां 'कॉरपोरेट समर्थक' और 'मजदूर विरोधी' हैं। उनका कहना है कि 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर बनाए गए चार नए श्रम कोड-वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 से श्रमिकों के अधिकार कमजोर हुए हैं, नौकरी की सुरक्षा घटी है और नियोक्ताओं को छंटनी व नियुक्ति में अधिक छूट मिली है। ट्रेड यूनियनों ने सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण, वेतन सुरक्षा सहित अन्य श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चिंता जताई है।

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हड़ताल का बैंकिंग सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन ( एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) सहित कई बैंक यूनियनों ने हड़ताल को समर्थन दिया है। कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में बाधा और सड़क अवरोध की आशंका भी जताई जा रही है।

इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने राज्य कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि यदि वे कल कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो उन्हें उस दिन का वेतन नहीं दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल में भागीदारी को अधिकृत अवकाश नहीं माना जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक सेवाओं की निरंतरता और प्रशासनिक कार्य सुचारू रखने के लिए उठाया गया है।

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सत्तारूढ़ द्रमुक (डीएमके) और उसके सहयोगी दलों ने हड़ताल का समर्थन करने की घोषणा की है। सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) के बैनर तले कल शाम राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। कांग्रेस, एमडीएमके, वीसीके, सीपीआई, सीपीआई (एम), कमल हासन की एमएनएम सहित अन्य दलों के नेता इसमें भाग लेंगे। तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के सेल्वपेरुंथगई ने कहा कि वे स्वयं चेन्नई में प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार व्यापक श्रम संहिताएं लागू की हैं। इनमें वेतन संहिता-2019, औद्योगिक संबंध संहिता-2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता,-2020 शामिल हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि श्रम कानूनों का एकीकरण ऐतिहासिक सुधार है, जिससे अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी, पुराने प्रावधानों का आधुनिकीकरण होगा और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही श्रमिकों के अधिकार और कल्याण भी सुरक्षित रहेंगे। हालांकि विपक्षी दल और ट्रेड यूनियनें इन श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग पर अडिग हैं।