How LTTE chief prabhakaran killed rajiv gandhi assassination case tamil nadu Vijay कैसे मारा गया था लिट्टे चीफ प्रभाकरन, राजीव गांधी की हत्या के पीछे था इसका हाथ, India News in Hindi - Hindustan
More

कैसे मारा गया था लिट्टे चीफ प्रभाकरन, राजीव गांधी की हत्या के पीछे था इसका हाथ

सीएम विजय के बयान के बाद लिट्टे चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन फिर चर्चा में है। जानिए राजीव गांधी की हत्या के मास्टरमाइंड प्रभाकरन को श्रीलंकाई सेना ने कैसे मार गिराया था और क्यों तमिलनाडु का एक धड़ा उसे आज भी 'हीरो' मानता है। पूरी इनसाइड स्टोरी।

Tue, 19 May 2026 09:12 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नई
share
कैसे मारा गया था लिट्टे चीफ प्रभाकरन, राजीव गांधी की हत्या के पीछे था इसका हाथ

हाल ही में 18 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने मुल्लीवैक्काल (Mullivaikkal) नरसंहार की याद में ईलम तमिलों के अधिकारों का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया। यह तारीख कोई आम दिन नहीं है। 18 मई 2009 ही वह दिन था, जब 26 साल तक चले श्रीलंकाई गृहयुद्ध का खूनी अंत हुआ था और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) का चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन मारा गया था।

भारत में प्रभाकरन का नाम आते ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की खौफनाक यादें ताजा हो जाती हैं। लेकिन एक ऐसा शख्स, जो भारत और दुनिया की नजरों में एक खूंखार आतंकी था, उसे तमिलनाडु के कई हिस्सों में आज भी एक 'हीरो' के तौर पर क्यों देखा जाता है? आइए, इस पूरे घटनाक्रम और इतिहास को विस्तार से समझते हैं।

कौन था वेलुपिल्लई प्रभाकरन?

प्रभाकरन ने 1976 में श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय और सरकार के कथित अत्याचारों के खिलाफ तमिलों के अधिकारों के लिए LTTE की स्थापना की थी। उसका एकमात्र लक्ष्य श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों को मिलाकर एक स्वतंत्र देश 'तमिल ईलम' बनाना था।

उसने लिट्टे को एक बेहद ताकतवर और पेशेवर सैन्य संगठन में बदल दिया। दुनिया के बहुत कम विद्रोही गुटों के पास अपनी नौसेना (सी टाइगर्स) और वायु सेना (एयर टाइगर्स) थी, जो लिट्टे के पास मौजूद थी।

सुसाइड बॉम्बर का जनक

लिट्टे दुनिया का पहला ऐसा आतंकी संगठन माना जाता है जिसने आत्मघाती हमलावरों का सबसे खौफनाक और रणनीतिक इस्तेमाल किया। इसके लड़ाके हमेशा अपने गले में साइनाइड का कैप्सूल पहनते थे, ताकि पकड़े जाने पर तुरंत अपनी जान दे सकें।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:CM विजय ने LTTE के पूर्व चीफ प्रभाकरन को दी श्रद्धांजलि, बोले- उनकी यादों को...

राजीव गांधी की हत्या का खूनी मास्टरमाइंड

प्रभाकरन भारत को, खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को, अपने स्वतंत्र ईलम के सपने के बीच सबसे बड़ी दीवार मानता था।

शांति सेना (IPKF) की तैनाती: 1987 में भारत-श्रीलंका समझौते के तहत राजीव गांधी ने श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) भेजी। इसका मकसद दोनों गुटों में शांति बहाल करना था, लेकिन जल्द ही भारतीय सेना और लिट्टे के बीच सीधी जंग छिड़ गई। इस लड़ाई में लिट्टे के कई लड़ाके मारे गए और उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। प्रभाकरन ने इसका बदला लेने की ठान ली थी।

श्रीपेरंबदूर का वह काला दिन

21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली चल रही थी। एक महिला आत्मघाती हमलावर (धनु) राजीव गांधी के पैर छूने के बहाने आगे बढ़ी और खुद को बम से उड़ा लिया। इस भयानक हमले का पूरा ताना-बाना प्रभाकरन ने बुना था, जिसे उसके खास आदमी शिवरासन ने अंजाम तक पहुंचाया।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:भिंडरावाले से मिलने गए थे राजीव गांधी, तभी मिला एक लेटर…; कैप्टन ने खोले राज

नंदीकदल का दलदल और प्रभाकरन का अंत

मई 2009 आते-आते श्रीलंकाई सेना ने लिट्टे को हर तरफ से बुरी तरह घेर लिया था। प्रभाकरन के पास अब भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था। श्रीलंकाई सेना की 53वीं डिवीजन ने मुल्लीवैक्काल के पास नंदीकदल लैगून (एक बड़े दलदली इलाके) में लिट्टे के बचे-खुचे कमांडरों को घेर लिया। 18 मई 2009 की सुबह, प्रभाकरन ने अपने कुछ सबसे वफादार कमांडरों के साथ एक एंबुलेंस और बख्तरबंद गाड़ी में बैठकर सेना की घेराबंदी तोड़ने की आखिरी कोशिश की।

सेना के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में वह मारा गया। बताया जाता है कि उसके सिर में बेहद करीब से गोली लगी थी। श्रीलंकाई सेना ने बाद में उसका शव दुनिया के सामने पेश किया और डीएनए (DNA) टेस्ट के जरिए आधिकारिक पुष्टि की गई कि लिट्टे चीफ अब जिंदा नहीं है।

तमिलनाडु में कुछ लोग इसे 'हीरो' क्यों मानते हैं?

राजीव गांधी जैसे लोकप्रिय नेता की हत्या के बावजूद, तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों, नेताओं और तमिल राष्ट्रवादियों के बीच प्रभाकरन को लेकर एक खास तरह की सहानुभूति देखने को मिलती है। इसके पीछे कई गहरी वजहें हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:विजय को फिल्म डायरेक्टर से मिला खास तोहफा, तमिलनाडु के CM पोस्ट से तगड़ा कनेक्शन

सांस्कृतिक और भाषाई जुड़ाव

तमिलनाडु के लोगों का श्रीलंकाई (ईलम) तमिलों के साथ खून, भाषा और संस्कृति का बहुत पुराना रिश्ता है। वे उनके दर्द को अपना मानते हैं। कई तमिल समर्थकों का मानना है कि सिंहली बहुसंख्यक सरकार द्वारा तमिलों पर किए गए भयानक अत्याचारों के खिलाफ प्रभाकरन ही वह इकलौती मजबूत आवाज था, जिसने पलटकर वार किया और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी।

तमिलनाडु की राजनीति में 'तमिल अस्मिता' हमेशा से सबसे बड़ा मुद्दा रही है। चुनाव के समय या मुल्लीवैक्काल दिवस पर ईलम तमिलों का मुद्दा भावनाओं से जुड़ जाता है। यही वजह है कि नेताओं के लिए इन भावनाओं का सम्मान करना और ईलम तमिलों के अधिकारों की बात करना एक राजनीतिक और सामाजिक जरूरत बन जाता है।