गंगा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण; सुप्रीम कोर्ट भड़का, सरकार से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल हैं, उन्होंने सभी गंगा से गुजरने वाले राज्यों से अतिक्रमणों की संख्या, उन्हें हटाने के लिए उठाए गए कदम, समय-सीमा और भविष्य की योजना की विस्तृत जानकारी मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार व नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) को निर्देश दिया कि वे गंगा नदी के किनारों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर अतिक्रमण की स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करें। यह आदेश पटना में गंगा के फ्लडप्लेन पर अवैध निर्माणों से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिकाकर्ता अशोक कुमार सिन्हा की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने कोर्ट को बताया कि गंगा के किनारों पर बड़े स्तर पर अतिक्रमण हो रहे हैं, जो नदी की पारिस्थितिकी, जलीय जीवन और विशेष रूप से गंगा डॉल्फिन जैसे दुर्लभ प्रजातियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। कोर्ट ने इस समस्या को पूरे देश स्तर पर गंभीर मानते हुए सभी संबंधित राज्यों से भी जानकारी मांगी है।
यह मामला गंगा की सफाई और संरक्षण से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई बार गंगा प्रदूषण और अतिक्रमण पर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र को जल संसाधन मंत्रालय की अधिसूचना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उपायों की जानकारी देने को कहा है, जिसमें नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण, प्रबंधन और पारिस्थितिक प्रवाह से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। रिपोर्ट में प्लास्टिक कचरे से नदी के अवरुद्ध होने और किनारों पर अवैध संरचनाओं की समस्या का भी जिक्र किया गया है। कोर्ट ने नोट किया कि एनएमसीजी ने आखिरी बार 2024 में नदी की स्थिति पर अपडेट दिया था, जिसके बाद कोई नई प्रगति रिपोर्ट नहीं आई है। यह निर्देश गंगा को बचाने की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।
SC का सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन शामिल हैं, उन्होंने सभी गंगा से गुजरने वाले राज्यों से अतिक्रमणों की संख्या, उन्हें हटाने के लिए उठाए गए कदम, समय-सीमा और भविष्य की योजना की विस्तृत जानकारी मांगी है। विशेष रूप से बिहार सरकार से पटना के आसपास के क्षेत्रों में स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है, जहां फ्लडप्लेन पर निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित कर रहे हैं। कोर्ट ने जोर दिया कि गंगा जैसी पवित्र और राष्ट्रीय महत्व की नदी को अवैध कब्जों से मुक्त रखना सभी की जिम्मेदारी है। यह आदेश 14 मार्च 2026 को प्रकाशित हुआ और आगे की सुनवाई के लिए समय दिया गया है। इससे पहले भी कोर्ट ने बिहार और केंद्र को रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब दायरा पूरे देश तक बढ़ा दिया गया है।
यह फैसला गंगा संरक्षण अभियान को नई गति दे सकता है। लंबे समय से गंगा के किनारों पर मकान, दुकानें, फैक्टरियां और अन्य संरचनाएं अवैध रूप से बनी हुई हैं, जो बाढ़ के दौरान खतरा बढ़ाती हैं और नदी की स्वच्छता को प्रभावित करती हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम केंद्र, राज्यों और एनएमसीजी के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद जगाता है। यदि रिपोर्ट में कमी पाई गई तो कोर्ट सख्त कार्रवाई कर सकता है। गंगा को स्वच्छ और मुक्त रखना न केवल पर्यावरणीय बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी जरूरी है। इस मामले की अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे गंगा के किनारों को अतिक्रमण मुक्त करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।




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