Supreme Court quashes 80 cases filed by lawyer husband, orders 5 crore alimony for his wife in Matrimonial Mahabharata बंद करो ‘वैवाहिक महाभारत’, SC ने वकील को सिखाया सबक; 10 साल से परेशान पत्नी को दिलवाए 5 CR, India News in Hindi - Hindustan
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बंद करो ‘वैवाहिक महाभारत’, SC ने वकील को सिखाया सबक; 10 साल से परेशान पत्नी को दिलवाए 5 CR

सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर शादी को रद्द कर दिया कि अब इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है  और पत्नी के उत्पीड़न को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सभी लंबित मुकदमों को रद्द कर दिया।

Wed, 8 April 2026 08:32 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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बंद करो ‘वैवाहिक महाभारत’, SC ने वकील को सिखाया सबक; 10 साल से परेशान पत्नी को दिलवाए 5 CR

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई करते हुए एक तिकड़मबाज वकील पति को न सिर्फ उसके कानूनी दांवपेच के लिए सबक सिखाया बल्कि उससे उसकी पत्नी को 5 करोड़ रुपये का एकमुश्त गुजारा भत्ता भी दिलवाया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान इस केस को वैवाहिक महाभारत करार दिया और इसे बंद करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि वकील पति ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए उस पर और उसकी पैरवी करने वाले वकीलों पर कुल 80 मुकदमे दर्ज कर रखे हैं। इसके साथ ही अदालत ने वकील पति द्वारा दायर 80 से अधिक मामलों को निरस्त कर दिया।

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मामले की पृष्ठभूमि क्या?

बार एंड बेंच के मुताबिक, इस दंपति का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था लेकिन 2016 में दोनों अलग हो गए। इसके बाद विवाद लगातार बढ़ता गया। पति, जो पेशे से वकील है, ने पत्नी, उसके परिजनों और यहां तक कि उसके वकीलों के खिलाफ भी विभिन्न अदालतों और मंचों पर 80 से अधिक मुकदमे दायर कर दिए। इसे देखते हुए पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला अब “सारी सीमाएं पार कर चुका है” और इसे समाप्त करना ही न्यायोचित होगा।

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5 करोड़ का एकमुश्त निपटान

अदालत ने पति के आचरण को “दुर्भावनापूर्ण, जिद्दी और प्रतिशोधपूर्ण” करार दिया और कहा कि उसने अपनी कानूनी जानकारी का दुरुपयोग किया है। अदालत ने विवाद को समाप्त करने के लिए पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को 5 करोड़ रुपये की राशि एकमुश्त दे। यह राशि गुजारा भत्ता, बच्चों के पालन-पोषण का खर्च और लंबित मुकदमों के खर्च को शामिल करते हुए अंतिम समझौते के रूप में निर्धारित की गई है।

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बच्चों की कस्टडी और अन्य आदेश

अदालत ने दो नाबालिग बच्चों की पूर्ण कस्टडी मां को सौंपते हुए पिता को मासिक मुलाकात का अधिकार दिया। साथ ही, यह भी निर्देश दिया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद ही पत्नी मुंबई स्थित ससुर के स्वामित्व वाले फ्लैट को खाली करे। पत्नी अपने ससुर के फ्लैट में रह रही थी जिसकी कीमत पांच करोड़ है। सुप्रीम कोर्ट ने पति को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह भविष्य में पत्नी, उसके परिवार या वकीलों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं करेगा। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का उल्लंघन होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वकील पति मामले में अपनी पैरवी खुद कर रहा था।