Supreme Court Disposes of 61 Cases at Once Couple Granted Divorce After 32 Years सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ निपटा दिए 61 मुकदमे, 32 साल बाद दंपती को मिला तलाक, India News in Hindi - Hindustan
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सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ निपटा दिए 61 मुकदमे, 32 साल बाद दंपती को मिला तलाक

सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच विवाद के 61 मुकदमों को एक साथ निपटाते हुए तलाक को मंजूरी दे दी है। 1994 से दंपती के बीच केस चल रहे थे। देश की अलग-अलग अदालतों में घरेलू हिंसा और संपत्ति विवाद के कई मुकदमे चल रहे थे। 

Sat, 4 April 2026 06:53 AMAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ निपटा दिए 61 मुकदमे, 32 साल बाद दंपती को मिला तलाक

सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ देशभर की अदालतों में चल रहे 61 मुकदमों पर रोक लगाते हुए एक दंपती को तलाक की मंजूरी दे दी है। 1994 से चल रहे तलाक के मुकदमे को सुप्रीम कोर्ट ने अंजाम तक पहुंचा दिया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के तलाक को मंजूरी दे दी। यह केस अवमानना के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हालांकि इसी साल जनवरी-फरवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इसे अंतिम मोड़ देने का विचार बनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले दोनों पक्षों को सुना और फिर उनके बीच बातचीत करवाई। इसके बाद इस निर्णय पर पहुंचा कि आपसी सहमति से तलाक लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच एलिमनी को लेकर बात फाइनल हो गई है। पति महिला को 1 करोड़ रुपये एकमुश्त देगा। इसके अलावा लोनावाल की प्रॉपर्टी का शेयर पत्नी को देगा।

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बंद कर दिए 61 मुकदमे

कोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता के खाते में प्रॉपर्टी के शेयर के रूप में 90 लाख रुपये जमा करवाए जाएं। इसके बाद इस मामले में चल रहे सारे विवादों को खत्म माना जाएगा। इसके अलावा दोनों में से कोई भी पार्टी कोई सिविल या फिर क्रिमिनल केस नहीं करेंगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग अदालतों में चल रहे 61 मुकदमों को रद्द कर दिया। इनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद जैसे मामले थे जो कि हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह जानने की कोशिश की कि क्या दोनों तलाक चाहते हैं। इसके बाद संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा करवाया। दोनों ने लिखित रूप में कहा कि कोर्ट का फैसला दोनों पक्ष मानेंगे। आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामला का स्थायी समाधान निकालने के लिए किसी तरह की अन्य बाधा नहीं आनी चाहिए। बता दें कि यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को जरूरी आदेश देने का विशेषाधिकार देता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन मुकदमों को खत्म किया जा रहा है अगर उसी मुद्दे पर फिर से कोई केस फाइल होता है तो उसकी सुनवाई नहीं होगी। दोनों पक्ष भी इस बात पर सहमत हुए कि अब वे कोई केस नहीं लड़ना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अलग-अलग अदालतों से जारी न्यायिक आदेशों को भी खारिज कर दिया।