एक न्यायाधीश पर इतने भद्दे आरोप लगाए, अब माननीय बोल रहे; CJI सूर्यकांत ने वकील को लताड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व CJI दीपक मिश्रा को 'बचाने' के लिए 1 करोड़ रुपये फीस मांगने वाले वकील अशोक पांडे की याचिका खारिज कर दी है। CJI सूर्यकांत ने तंज कसते हुए कहा कि समाज सेवा अनमोल है, इसकी कीमत नहीं लगाई जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वकील अशोक पांडे द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में वकील ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा को 'बचाने' के लिए दायर किए गए मुकदमों की फीस और खर्च के तौर पर केंद्र सरकार से 1 करोड़ रुपये दिलाने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस याचिका को निराधार और गलतफहमी पर आधारित करार देते हुए खारिज कर दिया। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा उनकी याचिका को खारिज करने का फैसला बिल्कुल सही था।
अदालत में हुई बातचीत और CJI का तंज
सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में कुछ रोचक और तीखे सवाल-जवाब हुए। CJI ने शुरुआत में ही वकील पांडे से पूछा, 'आपने कोई खर्च नहीं किया है? आप तो व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे।' इसके जवाब में पांडे ने कहा कि उन्होंने मुकदमेबाजी पर करीब 2 लाख रुपये खर्च किए थे और इसके लिए उन्हें अपनी बेटी से पैसे लेने पड़े थे।
'माननीय' शब्द पर आपत्ति
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब पांडे ने पूर्व CJI के लिए 'माननीय' (Hon'ble) शब्द का इस्तेमाल किया, तो CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में पूछा, 'एक न्यायाधीश के खिलाफ इतने भद्दे आरोप लगाने के बाद, अब आप माननीय शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं?'
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि जब पूर्व CJI को महाभियोग का सामना करना पड़ रहा था, तब कोई भी उनके बचाव में नहीं आया था। इस पर CJI ने तंज कसते हुए कहा कि किसी को भी समाज सेवा के बदले मौद्रिक लाभ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। CJI ने टिप्पणी की, 'आपने संस्था को महान सामाजिक सेवा प्रदान की है। यह अनमोल है। इसे 1 करोड़ या 2 करोड़ रुपये में कैसे आंका जा सकता है?'
इलाहाबाद हाईकोर्ट का पिछला फैसला
याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय को उन्हें 1 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश देने की मांग वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। पांडे का दावा था कि उन्होंने तत्कालीन CJI जस्टिस दीपक मिश्रा को 'अपमान, प्रताड़ना और पद से हटाए जाने' से बचाने के लिए ये केस लड़े थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने न केवल उनकी याचिका खारिज की थी, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 134A के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए प्रमाण पत्र देने के उनके अनुरोध को भी ठुकरा दिया था।
राष्ट्रपति को भेजा गया था ज्ञापन
अपनी रिट याचिका में, वकील अशोक पांडे ने अपनी उस अर्जी के खारिज होने को भी चुनौती दी थी जो उन्होंने 28 फरवरी, 2024 को भारत के राष्ट्रपति को भेजी थी। इस अर्जी में उन्होंने तत्कालीन CJI को 'बचाने' के एवज में दी गई कानूनी सेवाओं के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की थी। पांडे ने यह तर्क भी दिया कि यह कानून का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए किसी संदर्भ को मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा खारिज किया जा सकता है, विशेषकर राष्ट्रपति की उच्च संवैधानिक स्थिति को देखते हुए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस अनुरोध और तर्क को भी सिरे से खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला
गौरतलब है कि अप्रैल 2018 में, सात राजनीतिक दलों के 71 राज्यसभा सदस्यों ने तत्कालीन CJI जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, तत्कालीन उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने बाद में इस नोटिस को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसमें कोई पर्याप्त आधार या ठोस गुण-दोष नहीं हैं।




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