Supreme Court Collegium recommends appointment of 5 retired judges as ad-hoc judges Allahabad High Court इलाहाबाद हाई कोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की बतौर एड-हॉक नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम का अनूठा फैसला, India News in Hindi - Hindustan
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इलाहाबाद हाई कोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की बतौर एड-हॉक नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम का अनूठा फैसला

कॉलेजियम ने इन नामों को मंजूरी देते हुए प्रस्ताव पारित किया है कि ये न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बैठकर और कार्य करके मामलों का निपटारा करेंगे। यह सिफारिश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से की जा सकेगी।

Wed, 4 Feb 2026 12:32 AMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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इलाहाबाद हाई कोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की बतौर एड-हॉक नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम का अनूठा फैसला

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 224A का सहारा लेते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए 5 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अस्थायी (एड-हॉक) न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। यह कदम देश की सबसे बड़ी उच्च न्यायालयों में से एक इलाहाबाद हाईकोर्ट में बढ़ते मामलों के बोझ और न्यायाधीशों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सिफारिश के अनुसार इन न्यायाधीशों की नियुक्ति 2 वर्ष की अवधि के लिए होगी। यह अनुच्छेद 224ए के तहत की गई चौथी ऐसी कार्रवाई है, जिसे 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़े पैमाने पर लंबित मामलों से निपटने के लिए सक्रिय किया था।

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इन 5 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में जस्टिस मोहम्मद फैज आलम खान (जो वर्तमान में NCLAT में न्यायिक सदस्य हैं), जस्टिस मोहम्मद असलम, जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी, जस्टिस रेणु अग्रवाल और जस्टिस ज्योत्स्ना शर्मा शामिल हैं। कॉलेजियम ने इन नामों को मंजूरी देते हुए प्रस्ताव पारित किया है कि ये न्यायाधीश इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बैठकर और कार्य करके मामलों का निपटारा करेंगे। यह सिफारिश राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से की जा सकेगी, जैसा कि अनुच्छेद 224A में प्रावधान है।

लंबित मामलों का जल्द निपटारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट देश का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है, जहां स्वीकृत पदों की संख्या 160 है, लेकिन वर्तमान में केवल 110 न्यायाधीश कार्यरत हैं। इससे मामलों का ढेर लगता जा रहा है और न्याय वितरण में देरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में, खासकर जनवरी 2025 और दिसंबर 2025 में, एड-हॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन किया है ताकि उच्च न्यायालयों में लंबित आपराधिक और अन्य मामलों को तेजी से निपटाया जा सके। इस फैसले से पहले नियमित रिक्तियों को भरने के प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अपर्याप्तता बनी हुई है।

आखिर क्यों पड़ी जरूरत

यह कदम न्यायिक प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक दुर्लभ और सराहनीय प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी न्यायाधीशों की नियुक्ति से इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हजारों मामलों का तेज निपटारा संभव होगा, जिससे आम जनता को जल्द न्याय मिल सकेगा। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अन्य उच्च न्यायालयों में भी इसी तरह के उपाय अपनाए जा सकते हैं, जहां रिक्तियां और पेंडेंसी बड़ी समस्या बनी हुई है।

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