Rahul Gandhi Naravane memoir demand use of yaar word adds fuel to fire in Lok Sabha budget session 'यह संसद है, चेयर को यार नहीं कह सकते'; बीच बहस में अचानक किस पर भड़के लोकसभा अध्यक्ष, India News in Hindi - Hindustan
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'यह संसद है, चेयर को यार नहीं कह सकते'; बीच बहस में अचानक किस पर भड़के लोकसभा अध्यक्ष

राहुल गांधी ने कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए मेमोयर के अंशों को प्रामाणिक बताया और सदन में पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जानकारी 100% सत्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा जरूरी मुद्दा है। 

Tue, 3 Feb 2026 06:33 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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'यह संसद है, चेयर को यार नहीं कह सकते'; बीच बहस में अचानक किस पर भड़के लोकसभा अध्यक्ष

लोकसभा में पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित मेमोयर को लेकर तीखी बहस मंगलवार को भी जारी रही। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान इस मेमोयर के आधार पर 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद और गलवान संघर्ष पर सवाल उठाने की कोशिश की। सदन में हंगामा बढ़ने पर स्पीकर ने राहुल को रोका, लेकिन विपक्षी सांसदों के बीच से किसी ने स्पीकर को 'यार' कहकर संबोधित किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने नाराजगी जताते हुए कहा, "क्या है यह यार... यह संसद है, लोकसभा है... चेयर को यार नहीं कह सकते।" यह टिप्पणी सदन में और तनाव बढ़ाने वाली साबित हुई, जिसके बाद कागज फेंके गए और कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दी गई।

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राहुल गांधी ने कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए मेमोयर के अंशों को प्रामाणिक बताया और सदन में पेश करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जानकारी 100% सत्य है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। मेमोयर में जनरल नरवणे ने गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की घुसपैठ और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से फैसले में देरी या अनिर्णय का जिक्र किया है। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार इस मेमोयर को प्रकाशित नहीं होने दे रही है, जो चीन के साथ सीमा पर हुई घटनाओं की सच्चाई छिपाने की कोशिश है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसका विरोध किया और राहुल पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की मांग

विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाया। कांग्रेस ने कहा कि नियमों का दुरुपयोग कर नेता प्रतिपक्ष को चुप कराया जा रहा है। राहुल गांधी ने दोहराया कि अगर लेख का हवाला नहीं दिया जा सकता तो भी राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा होनी चाहिए। पूर्व सेना प्रमुख की मेमोयर 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को 2024 में प्रकाशित होना था, लेकिन रक्षा मंत्रालय की समीक्षा लंबित होने से अब तक अप्रकाशित है। इस विवाद ने 2020 के लद्दाख टकराव, जहां 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे, को फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया।

सदन में जारी रह सकता है हंगामा

यह घटना लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाती है। सरकार ने मेमोयर के अंशों को असत्यापित बताते हुए इसका विरोध किया, जबकि विपक्ष ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बनाया। सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने से बजट सत्र की शुरुआत प्रभावित हुई। यह विवाद भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव और राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर नए सवाल खड़े करता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा चर्चा में फिर से प्रमुखता से उभर आया।

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