Supreme Court Angry Says What Wrong With Allahabad High Court We Failed to Understand इलाहाबाद HC के साथ दिक्कत क्या है, समझ से बाहर है; क्यों भड़क उठा सुप्रीम कोर्ट, India News in Hindi - Hindustan
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इलाहाबाद HC के साथ दिक्कत क्या है, समझ से बाहर है; क्यों भड़क उठा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट पर सवाल खड़े किए। उसने कहा कि इस हाई कोर्ट के साथ दिक्कत क्या है, यह समझ से परे है। यह मामला शादी के बाद पत्नी की हत्या से जुड़ा हुआ था, जिसमें आरोपी पति को जमानत मिल गई थी। पत्नी के पिता ने बेल रद्द करवाने को याचिका दायर की थी।

Thu, 30 April 2026 02:51 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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इलाहाबाद HC के साथ दिक्कत क्या है, समझ से बाहर है; क्यों भड़क उठा सुप्रीम कोर्ट

शादी के बाद पत्नी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से सख्त सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि इस हाई कोर्ट के साथ दिक्कत क्या है, समझ से बाहर है। कोर्ट ने पूछा कि उसने आरोपी पति को जमानत क्यों दी, जबकि उस पर दहेज से जुड़ी मौत के आरोप हैं। आरोपी कई महीनों तक जेल में रहा, जिसके बाद उसे जमानत दी गई थी। इसके खिलाफ उसकी मृत पत्नी के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और जमानत को रद्द करने की मांग की।

कोर्ट ने बेल कैंसल करते हुए आरोपी को हफ्तेभर में सरेंडर करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट को सालभर में ट्रायल पूरा करने के लिए कहा। लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी देखी, जिसमें कहा गया था कि गर्दन के आसपास चोट के निशान लगे थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के वकील से भी सवाल किया, जिस पर उन्होंने जवाबी हलफनामा दायर करने की बात की।

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'वकील साहब, मुद्दे की बात करो'

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कई सख्त सवाल पूछे। उन्होंने बचाव पक्ष के वकील से कहा कि शादी के सात सालों के भीतर हुई मौत और इस तरह के गंभीर आरोपों को देखते हुए जमानत क्यों दी जानी चाहिए? वकील साहब, मुद्दे की बात करें, कमजोर दलीलें मत दें, वरना हम आपकी जमानत यहीं रद्द कर देंगे। आपकी पत्नी घर पर ही संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर चोट के भी निशान थे। पत्नी की मौत पर आप क्या कहेंगे? आप पर दहेज हत्या का आरोप है।

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'हाई कोर्ट के साथ दिक्कत क्या है'

जस्टिस पारदीवाला ने कहा, ''इस हाई कोर्ट के साथ दिक्कत क्या है, मेरी समझ से बाहर है। ऐसे मामलों में, जहां जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वहां बेल दी गई।'' राज्य की तरफ से पेश हुए वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि आरोपी 18 महीनों तक कस्टडी में रहा। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने कहा, ''वकील साहब, आप क्या कह रहे हैं, यह हत्या का मामला है, 304 बी, हां। उसकी (पत्नी) की गला घोंटकर हत्या की गई है। क्या आप चाहते हैं कि हम इसे दिखाएं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर आइए।''

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