Sooner or later Owaisi too will call himself a Hindu Giriraj elated by HC verdict on the Bhojshala complex आज नहीं तो कल, ओवैसी भी खुद को हिंदू बोलेंगे; भोजशाला परिसर पर HC के फैसले से गिरिराज गदगद, India News in Hindi - Hindustan
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आज नहीं तो कल, ओवैसी भी खुद को हिंदू बोलेंगे; भोजशाला परिसर पर HC के फैसले से गिरिराज गदगद

हाईकोर्ट ने विवादित परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार स्वीकार की और इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार स्मारक में नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।

Sun, 17 May 2026 08:45 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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आज नहीं तो कल, ओवैसी भी खुद को हिंदू बोलेंगे; भोजशाला परिसर पर HC के फैसले से गिरिराज गदगद

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर बताया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार तथा एएसआई इसके प्रशासन और प्रबंधन पर निर्णय ले सकते हैं। इस फैसले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के फायरब्रांड नेता और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। उन्होंने इसको लेकर असदुद्दीन ओवैसी पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि आज नहीं तो कल, ओवैसी भी इस बात को स्वीकार करेंगे कि वे हिंदू हैं।

इससे पहले आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट पलट देगा। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे दुरुस्त करेगा और इस आदेश को पलट देगा। बाबरी मस्जिद के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।

आपको बता दें कि हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर पुरातात्विक व ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की अधिसूचनाओं व उसके वैज्ञानिक सर्वेक्षण और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि परमार वंश के राजा भोज की विरासत से जुड़े इस स्थल पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के मुकदमे में शीर्ष अदालत के फैसले में निर्धारित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। खंडपीठ ने सामाजिक संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ और कुलदीप तिवारी व अन्य लोगों की दायर दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं मंजूर की। अदालत ने आगे कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद के विवादित क्षेत्र का धार्मिक स्वरूप वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर वाली भोजशाला के रूप में तय किया जाता है।

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अदालत ने कहा कि हम इस निष्कर्ष को दर्ज करते हैं कि ऐतिहासिक साहित्य ने स्थापित किया है कि विवादित क्षेत्र का स्वरूप भोजशाला के रूप में था जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन केंद्र था और राजा भोज के काल से संबंधित संदर्भों सहित साहित्य और स्थापत्य-संबंधी संदर्भ संकेत देते हैं कि धार में देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर विद्यमान था।

एएसआई का आदेश रद्द किया

हाईकोर्ट ने विवादित परिसर में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार स्वीकार की और इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार स्मारक में नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।

मुस्लिम समुदायों की याचिकाएं खारिज

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं थीं और विवादित स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा था। खंडपीठ ने मुस्लिम और जैन पक्षों की ओर से दायर चार याचिकाएं खरिज कर दीं।

अलग जमीन मांग सकते हैं मुस्लिम समुदाय

अदालत ने कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय की ओर से धार जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन आवंटन की अर्जी दी जाती है, तो राज्य सरकार इस पर कानूनी प्रावधानों के मुताबिक विचार कर सकती है।

ब्रिटेन से प्रतिमा लाने पर विचार कर सकती है सरकार

हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं ने लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने और उसे भोजशाला परिसर के भीतर पुनः स्थापित करने की गुहार भी की थी। इस पर अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने भारत सरकार के समक्ष पहले ही इस बारे में कई अभ्यावेदन प्रस्तुत किए हैं और सरकार इन पर विचार कर सकती है।

क्या था मामला?

भोजशाला को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था। इसमें हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी।

हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की

हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह ‘विशेन’ द्वारा वकील बरुण कुमार सिन्हा की ओर से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दाखिल की गई। याचिका में अनुरोध किया गया कि भोजशाला परिसर विवाद मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर कोई भी आदेश उसका पक्ष सुने बिना पारित नहीं किया जाए।

हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर देगा SC: ओवैसी

ओवैसी ने शुक्रवार को दावा किया कि मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर 700 सालों से एक मस्जिद रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर देगा जिसमें इस परिसर को मंदिर घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती रही है। उन्होंने कहा कि मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि यह समर्पण द्वारा स्थापित एक वक्फ है। 1904 में कलेक्टर ने 1904 के अधिनियम की धारा 4 और 13 के तहत इसे छोड़ दिया था। 1935 के धार स्टेट गजट में भी इस बात का जिक्र है कि यह जगह एक मस्जिद है और सरकार ने इसे छोड़ दिया था तथा मुस्लिम समुदाय को सौंप दिया था।

उन्होंने कहा कि ‘पूजा स्थल अधिनियम, 1991’ यह कहता है कि किसी भी मस्जिद, मंदिर या अन्य पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को उस रूप से बदला नहीं जा सकता जो 15 अगस्त, 1947 को था। उन्होंने एएसआई के रिकॉर्ड का भी हवाला दिया और दावा किया कि किसी भी पूजा स्थल की प्रकृति और स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। उन्होंने आगे दावा किया कि एएसआई ने 1951 और 1952 में यह स्पष्ट किया था कि यह एक मस्जिद है।