अंडरवियर-तौलिया के VIP इंतजाम वाले BSNL अफसर पर गिरी गाज, केंद्रीय मंत्री ने जताई घोर नाराजगी
मामला सामने आने के बाद केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था सरकारी मानकों के खिलाफ है। सूत्रों के मुताबिक, बंजाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।

सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL के एक वरिष्ठ अधिकारी के प्रस्तावित दौरे को लेकर जारी प्रोटोकॉल पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मामले को “अनुचित, अस्वीकार्य और चौंकाने वाला” बताते हुए BSNL डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। यह विवाद BSNL के निदेशक (CFA) विवेक बंजाल के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज दौरे से जुड़ा है, जो 25-26 फरवरी को प्रस्तावित था। हालांकि, आदेश के वायरल होने के बाद यह दौरा रद्द कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला?
एक आधिकारिक आदेश में बंजाल के दौरे के लिए करीब 20 तरह की व्यवस्थाएं तय की गई थीं, जिनके लिए लगभग 50 अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें उनके आगमन पर संगम स्नान, नाव की सवारी और धार्मिक स्थलों—बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट और पातालपुरी मंदिर—के दर्शन शामिल थे। सबसे ज्यादा विवाद “स्नान किट” को लेकर हुआ, जिसमें तौलिया, अंडरगारमेंट, चप्पल, कंघी, आईना और हेयर ऑयल जैसी वस्तुएं शामिल थीं। इसके अलावा घाट पर एक बेडशीट और होटल/सर्किट हाउस में ड्राई फ्रूट, फल, शेविंग किट, टूथपेस्ट, ब्रश, साबुन, शैम्पू आदि की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए थे।
सरकार और BSNL की प्रतिक्रिया
मामला सामने आने के बाद केंद्रीय संचार मंत्री सिंधिया ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था सरकारी मानकों के खिलाफ है। सूत्रों के मुताबिक, बंजाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। BSNL ने भी इस घटना को “प्रोफेशनल मानकों और मूल्यों के अनुरूप नहीं” बताया है। कंपनी ने कहा कि इस तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कौन हैं विवेक बंजाल?
विवेक बंजाल 1987 बैच के इंडियन टेलीकम्युनिकेशन सर्विस के ऑफिसर हैं। उनके पास इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री, कंप्यूटर साइंस में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग और MBA है। BSNL वेबसाइट पर मौजूद डेटा के मुताबिक, उन्हें भारत में टेलीकॉम नेटवर्क संभालने का 34 साल से ज़्यादा का अनुभव है। लेकिन इस विवाद ने सरकारी दौरों में प्रोटोकॉल और संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी खर्च के उचित उपयोग को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।




साइन इन