19 साल के छात्र ने CBSE के ऑनलाइन मार्किंग पोर्टल में लगा दी सेंध? इसे जानकर आप चौंक जाएंगे
ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठा विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ है कि सीबीएसई एक नई परेशानी से घिर गई है। यह मामला जुड़ा है एक 19 वर्षीय छात्र के दावे से। पढ़िए पूरी खबर…

सीबीएसई एक नए विवाद में घिरती नजर आ रही है। 19 साल के एक छात्र ने दावा किया है कि उसने बहुत पहले ही सीबीएसई के मार्किंग पोर्टल को हैक कर लिया था। इसे बोर्ड के डिजिटल इवैल्युएशन सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पोर्टल को हैक करने वाले छात्र का नाम निसर्ग अधिकारी बताया जा रहा है। टेक एंटरप्रेन्योर डीडी दास की पोस्ट के चलते यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। इसके मुताबिक 19 साल के शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित ब्लॉग में विस्तार से इसके बारे में जानकारी दी है।
फरवरी में किया था दावा
निसर्ग ने दावा किया कि उन्होंने फरवरी में सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल के भीतर कई गंभीर कमजोरियों की खोज की। बाद में इसके बारे में सीईआरटी-इन को रिपोर्ट भेजी थी। निसर्ग के मुताबिक इसके बाद कई महीनों तक इसको लेकर कोई बात नहीं हुई। फिर जब डीडी दास ने 26 मई को एक्स पर इस बारे में पोस्ट किया तो यह मामला फिर से ताजा हो गया। डीडी दास ने अपनी पोस्ट में इसे बेहद शर्मनाक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल में इतनी कमियां हैं कि कोई भी किसी का नंबर देख सकता है और यहां तक कि उन्हें बदल भी सकता है। इंडिया टुडे के मुताबिक खबर लिखे जाने तक सीबीएसई की तरफ से इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई थी।
खामियों तक कैसे पहुंचा छात्र
इस बारे में छात्र निसर्ग ने बताया कि वह केवल उत्सुकतावश ही इन खामियों तक पहुंच गया। उसने बताया कि सीबीएसई ने ओएसएम लांच किया और मैंने नोटिस किया कि पोर्टल लिंक पूरी तरह से पब्लिक है। निसर्ग के मुताबिक एक बार जब उसने साइट खोली और बैकग्राउंड रिक्वेस्ट का निरीक्षण करना शुरू किया तो पाया कि उसने जितना सोचा था, समस्याएं उससे कहीं बड़ी थीं। निसर्ग ने बताया कि लॉगिन पेज पर तीन चीजें पूछी जा रही थीं। यूजर आईडी, स्कूल कोड और एक पासवर्ड। बाद में ओटीपी का भी स्टेप था। उसने बताया कि पेज पर सबकुछ सामान्य था, लेकिन जब उसने इसके कोड को जानना शुरू किया तो उसकी हैरानी बढ़ती चली गई।
यह बेहद खतरनाक
निसर्ग आगे लिखते हैं कि मैंने ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल खोला और इससे खेलना शुरू कर दिया। मैं एचटीटीपी रिक्वेस्ट्स और जो भी मैं देख पा रहा था, उस पर गौर करने लगा। उसके ब्लॉग के मुताबिक, वह बेबसाइट पर जितनी गहराई में उतरता जा रहा था, उतनी ही गंभीर समस्याएं सामने आती जा रही थीं। निसर्ग का सबसे बड़ा दावा, मास्टर पासवर्ड को लेकर है। वेबसाइट में जिस जावास्क्रिप्ट बंडल का इस्तेमाल किया गया है, वह पब्लिक है। कोई भी इसमें लॉगिन कर सकता है।
फिर आगे वह इसके बारे में और विस्तार से बताता है। निसर्ग का दावा है कि समस्या केवल ओटीपी और पासवर्ड तक ही नहीं थी। इंटर्नल रूट्स में भी कई समस्याएं थीं। उसने बताया कि जितनी गंभीर कमियां मिली हैं, उससे कोई भी हैकर बड़े आराम से एग्जामिनर का अकाउंट बनाकर, इसमें बनी आईडी में बदलाव कर सकता है। वेबसाइट के सिस्टम में इसके लिए कोई भी इंतजाम नहीं किया गया है।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात
निसर्ग के दावे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि उसने इन सारी समस्याओं के बारे में सीबीएसई को फरवरी में ही बता दिया था। इसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। निसर्ग के मुताबिक उसके पहले ई-मेल के जवाब में कहा गया कि इस घटना के बारे में सीईआरटी-इन में रिपोर्ट करने के लिए आपका धन्यवाद। हमने आपकी शिकायत दर्ज कर ली है। इसके बाद निसर्ग ने कई बार फॉलोअप की कोशिश की, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें कोई भी अपडेट नहीं मिली।




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