'घूसखोर पंडत' पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी, फिल्म के टाइटल को बताया शर्मनाक
फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने विवाद के बाद माफी मांगी है और प्रचार सामग्री हटा दी है। उन्होंने कहा कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जिसमें पंडत शब्द केवल एक काल्पनिक चरित्र का उपनाम है और यह किसी जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आगामी फिल्म घूसखोर पंडत के टाइटल की तीखी आलोचना की है। शुक्रवार को एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान स्थिति को देखते हुए, जहां पहले धार्मिक आधार पर विभाजन हुआ और अब जाति के आधार पर हो रहा है। साथ ही यूजीसी दिशानिर्देशों में भी भेदभाव दिख रहा है, ऐसे में इस तरह का फिल्म टाइटल जारी करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि यह उसी समूह के खिलाफ रिवर्स लेबलिंग है, जिस पर अक्सर भेदभाव का आरोप लगता है। प्रियंका चतुर्वेदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री की जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अपनी सामग्री के लिए अधिक जवाबदेह होना चाहिए।
फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने विवाद के बाद माफी मांगी है और प्रचार सामग्री हटा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जिसमें पंडत शब्द केवल एक काल्पनिक चरित्र का उपनाम है और यह किसी जाति, धर्म या समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता। फिल्म में मुख्य भूमिका मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं, जो एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की कहानी दिखाती है। निर्देशक ने कहा कि टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जिसके लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं और प्रचार सामग्री हटाकर फिल्म को पूर्ण संदर्भ में देखने की अपील की है।
लखनऊ में एफआईआर दर्ज
इस बीच, लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे और उनकी टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि टाइटल और संभावित कंटेंट से धार्मिक तथा जातिगत भावनाएं आहत हुई हैं। इससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। ब्राह्मण समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों में व्यापक आक्रोश है, कुछ समूहों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। पुलिस ने कहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल
इसके साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें फिल्म की रिलीज और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता महेंद्र चतुर्वेदी के वकील विनीत जिंदल ने दावा किया है कि टाइटल और कंटेंट मानहानिकारक तथा सांप्रदायिक रूप से आपत्तिजनक है। याचिका में कहा गया है कि पंडत शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, हालांकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लग सकते हैं। यह मामला आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया में है।




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