Saffron Wave Sweeps Bangladesh Border Did Infiltration narrative shown Impact in Elections 63 percent Seat Strong Signal बांग्लादेश सीमा पर भी प्रचंड भगवा लहर, BJP के एक इस दांव ने 63% सीटों पर कैसे कर लिया ‘खामोश' कब्जा?, India News in Hindi - Hindustan
More

बांग्लादेश सीमा पर भी प्रचंड भगवा लहर, BJP के एक इस दांव ने 63% सीटों पर कैसे कर लिया ‘खामोश' कब्जा?

Saffron Wave Sweeps Bangladesh Border: विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की इस जीत के पीछे न सिर्फ उसका अवैध घुसपैठिए का मुद्दा और उस पर आक्रामक विरोधी रुख रहा बल्कि एक खामोश जनसांख्यिकीय आक्रमण का नैरेटिव भी है।

Mon, 11 May 2026 04:29 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
बांग्लादेश सीमा पर भी प्रचंड भगवा लहर, BJP के एक इस दांव ने 63% सीटों पर कैसे कर लिया ‘खामोश' कब्जा?

Saffron Wave Sweeps Bangladesh Border: हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने न केवल राज्य की राजनीति में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन करवाया है बल्कि सियासी मानचित्र पर भी बड़ा उलटफेर किया है। खासकर बांग्लादेश की सीमा से सटे सभी 44 विधानसभा क्षेत्रों में इस चुनाव में एक 'खामोश बदलाव' देखने को मिला है। आंकड़े बताते हैं कि इन 44 में से 28 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत दर्ज कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सबसे सुरक्षित किले को ढहा दिया है। पांच साल पहले यानी 2021 के चुनावों में भाजपा ने इन 44 सीमावर्ती सीटों में से केवल 17 पर जीत हासिल की थी, जिसका आंकड़ा अब बढ़कर 28 हो गया है, जो 63 फीसदी होता है।

यानी पांच सालों में भाजपा ने न केवल अपनी पुरानी सीटें बरकरार रखीं, बल्कि ममता बनर्जी की पार्टी TMC से 11 अतिरिक्त सीटें भी छीन लीं। दूसरी ओर, TMC की स्थिति यहाँ काफी कमजोर हुई है। 2021 में इन सीटों पर TMC का दबदबा था। उसने तब 27 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार उसकी संख्या लगभग आधी होकर मात्र 15 रह गई है। बाकी बची एक सीट, रानीनगर, कांग्रेस के खाते में चली गई है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:ममता की यह योजना नहीं रोकेंगे शुभेंदु, महिलाओं की बड़ी मददगार है ‘लक्ष्मी भंडार’

44 विधानसभा क्षेत्र किन-किन जिलों में?

ये 44 विधानसभा क्षेत्र कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों में फैले हुए हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है। सीमावर्ती सीटों से TMC के 15 विधायकों में से 11 मुस्लिम ही हैं। कांग्रेस के रानीनगर से जीतने वाले विधायक जुल्फिकार अली भी मुस्लिम हैं। उन्होंने TMC के निवर्तमान विधायक अब्दुल सौमिक हुसैन को 2,701 वोटों के मामूली अंतर से हराया है। दूसरी ओर, BJP ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भाजपा का “घुसपैठ विरोधी” अभियान बांग्लादेश से सटे इलाकों की राजनीति में निर्णायक साबित हुआ है?

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने को शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, पहली बैठक में क्या ऐलान

घुसपैठ और सीमा सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की इस जीत के पीछे न सिर्फ उसका अवैध घुसपैठिए का मुद्दा और उस पर आक्रामक विरोधी रुख रहा बल्कि एक ‘खामोश जनसांख्यिकीय आक्रमण’ (silent demographic invasion) का नैरेटिव भी है। यानी सीमाई क्षेत्र की आबादी का एक बड़ा हिस्सा चुपचाप अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर आक्रामक होकर भाजपा के पक्ष में लामबंद हुआ है। पिछले कई सालों से, बांग्लादेश से कथित घुसपैठ BJP के चुनाव प्रचार का एक अहम मुद्दा रहा है। लिहाजा, भाजपा ने भी चुनाव प्रचार के दौरान घुसपैठ को लेकर 'जीरो-टॉलरेंस' की नीति अपनाने और "डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट" मॉडल लागू करने का वादा किया था। यानी घुसपैठियों की पहचान करने, उन्हें हटाने और वापस भेजने का वादा किया था। इसके अलावा, पार्टी ने सरकार बनने के 45 दिनों के भीतर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने (fencing) के काम में तेजी लाने का संकल्प भी लिया था, जिसे आज (सोमवार, 11 मई को) शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे दी गई है।

इन इलाकों में जीत के अंतर ने भी चौंकाया

भाजपा की पकड़ इन संवेदनशील क्षेत्रों में कितनी मजबूत हुई है, इसका अंदाजा जीत के अंतर से भी लगाया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इन 28 सीटों पर भाजपा की जीत का औसत अंतर 40,195 वोट रहा, जो 2021 के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। खासकर जिन 17 सीटों को भाजपा ने बरकरार रखा है, वहाँ जीत का अंतर तीन गुना बढ़कर औसत 50,440 वोट तक पहुँच गया है। इसके ठीक उलटTMC की जीत का औसत अंतर आधा होकर 28,504 वोट रह गया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कहां होगा शुभेंदु अधिकारी का आधिकारिक निवास, ममता बनर्जी से क्या कनेक्शन

ध्रुवीकरण और जनसांख्यिकी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में BJP की सफलता के पीछे सुरक्षा का मुद्दा, पहचान की राजनीति और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ी वजह रहे हैं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम बहुल इन सीटों पर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था, जबकि TMC के 15 विजयी विधायकों में से 11 मुस्लिम हैं। कांग्रेस के एकमात्र विजयी उम्मीदवार ज़ुल्फ़िकार अली भी इसी समुदाय से आते हैं। यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। ममता बनर्जी पर जिस मुस्लिम आबादी के हितों की रक्षा करने का आरोप लगता है, वह भी अब उनके लिए सुरक्षित नहीं रहा है।

2,216 किलोमीटर लंबी है अंतरराष्ट्रीय सीमा

बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच पश्चिम बंगाल में 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से लगभग 563 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है। भाजपा की इस बड़ी जीत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के मतदाताओं के लिए सुरक्षा और घुसपैठ जैसे मुद्दे इस चुनाव में निर्णायक साबित हुए हैं। हालांकि आगे भी सवाल जारी हैं कि क्या क्या “घुसपैठ” का नैरेटिव BJP को लंबे समय तक राजनीतिक बढ़त देता रहेगा, या यह सिर्फ चुनावी लहर थी?