संकट के समय भारत की मदद कर अपनी किस्मत भी सुधार रहा यह देश, गैस से आगे बढ़ गई बात
ईरान-इजरायल युद्ध से उपजे LPG संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए 20 हजार KM दूर अर्जेंटीना का रुख किया है। जानिए कैसे भारत की यह गैस और स्टील डील अर्जेंटीना की डूबती अर्थव्यवस्था को संजीवनी दे रही है। पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी।

मध्य पूर्व इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे सीधे युद्ध ने दुनिया भर की सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। इस युद्ध का सबसे बड़ा और सीधा असर भारत की रसोई गैस (LPG) और औद्योगिक आपूर्ति पर पड़ रहा है। इसी भू-राजनीतिक संकट को भांपते हुए भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक 'मास्टरस्ट्रोक' खेला है और अपनी नजरें 20 हजार किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना पर गड़ा दी हैं।
दरअसल ईरान युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद है। इसके कारण भारत के लगभग 60% LPG आयात पर असर पड़ा है, जो घरेलू रसोई गैस की मुख्य सप्लाई है। ऐसे में भारत ने अर्जेंटीना का रुख किया है। यह न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है, बल्कि अर्जेंटीना की खराब आर्थिक हालत को भी संभालने में मदद कर रहा है। इसके अलावा, भारत अब स्टील निर्माण के लिए कच्चा माल जैसे कोकिंग कोल और आयरन ओर भी अर्जेंटीना, इंडोनेशिया और ओमान से लेने की तैयारी में है।
LPG संकट और अर्जेंटीना का सहारा
भारत दुनिया का बड़ा LPG आयातक है। पहले खाड़ी देशों से 90% से ज्यादा LPG स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता था। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद टैंकरों की आवाजाही रुक गई, जिससे मार्च में LPG आयात लगभग आधा रह गया। घरेलू स्तर पर राशनिंग हुई, कमर्शियल यूजर्स को दिक्कतें हुईं और सरकार ने पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दिया।
2026 के पहले तीन महीनों में अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन LPG निर्यात किया। जो पूरे 2025 के 22,000 टन से दोगुना से ज्यादा है। भारत से करीब 20,000 किलोमीटर दूर होने के बावजूद यह आपूर्ति तेजी से बढ़ी है। अर्जेंटीना के पास Vaca Muerta शेल गैस फील्ड है, जो दुनिया के सबसे बड़े शेल गैस भंडारों में से एक है। यहां से LPG उत्पादन बढ़ रहा है। जनवरी 2026 में 2.59 लाख टन रहा। यहां खास बात ये है कि अर्जेंटीना ने 2024 से पहले भारत को LPG नहीं भेजा था, लेकिन अब यह बाजार में स्थायी खिलाड़ी बन रहा है। नई प्रोसेसिंग फैसिलिटी (Bahia Blanca) 2026 में शुरू हो रही है, जो निर्यात बढ़ाएगी। यह भारत के लिए तुरंत राहत तो है ही, साथ ही इससे अर्जेंटीना को भी विदेशी मुद्रा मिल रही है।
इस डील से कैसे संवर रही है अर्जेंटीना की किस्मत?
अर्जेंटीना दशकों की सबसे भयंकर मंदी और महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में भारत का यह दांव अर्जेंटीना की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम कर रहा है। कट्टरपंथी आर्थिक सुधारों के लिए पहचाने जाने वाले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली की नीतियां अब रंग लाती दिख रही हैं। जनवरी के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों में दिसंबर के मुकाबले 0.4% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल की तुलना में, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के संकेतक में 1.9% की बढ़त दर्ज की गई है। यह ब्लूमबर्ग के अर्थशास्त्रियों के औसत अनुमान के बिल्कुल सटीक बैठी है। पिछली तिमाही में ग्रोथ भले ही उम्मीद से कम रही थी, लेकिन भारत जैसे विशाल बाजार को गैस और खनिज निर्यात करने से अर्जेंटीना को जो विदेशी मुद्रा मिलेगी, वह राष्ट्रपति जेवियर माइली के 'इकोनॉमिक शॉक थेरेपी' मॉडल को सफल बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति 'बुद्धिमानीपूर्ण', अर्जेंटीना बन सकता है प्रमुख साझेदार: राजदूत
ऊर्जा आयात में विविधता लाने की भारत की रणनीति की अर्जेंटीना ने जमकर सराहना की है। भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो ए. कौसिनो ने इसे एक 'बहुत ही बुद्धिमानीपूर्ण' कदम बताया है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अर्जेंटीना भारत को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति करने वाले एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभर सकता है। कौसिनो ने कहा- मुझे लगता है कि भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा के प्रावधान में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रही है। यह आपके पक्ष से बहुत ही सकारात्मक और बुद्धिमानी भरा कदम है।
कृषि और खनिजों से आगे बढ़कर अब ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों का सहयोग बढ़ रहा है। राजदूत ने कहा कि (क्षेत्रफल में) अर्जेंटीना दुनिया का आठवां और भारत सातवां सबसे बड़ा देश है। हालांकि, अर्जेंटीना की आबादी मात्र 5 करोड़ से कम है, जिसके कारण वहां ऊर्जा और भोजन की घरेलू खपत कम है। घरेलू खपत कम होने के कारण अर्जेंटीना के पास भारत और अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं जैसे बढ़ते बाजारों को भोजन, खनिज और ऊर्जा की बड़ी आपूर्ति करने की क्षमता है। कौसिनो ने माना कि घरेलू सुधारों के कारण अर्जेंटीना ऊर्जा संकट से बचा हुआ है, लेकिन आज की दुनिया इतनी गहराई से जुड़ी हुई है कि लंबे समय तक चलने वाली अस्थिरता अंततः पूरी दुनिया के देशों को प्रभावित कर सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी का हालिया बयान
राजदूत का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्यसभा में दिए गए संबोधन के ठीक बाद आया है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार और निरंतर आपूर्ति की मजबूत व्यवस्था है।पिछले एक दशक में, भारत ने अपने ऊर्जा आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हुई है। सरकार किसी एक ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए पूरे देश में पीएनजी (PNG) और एलपीजी (LPG) सहित घरेलू गैस वितरण को तेजी से बढ़ा रही है।
स्टील कच्चे माल तक पहुंच गई बात
LPG से आगे बढ़ते हुए भारत स्टील इंडस्ट्री के लिए कच्चा माल भी तलाश रहा है। भारत का स्टील प्रोडक्शन 2030 तक 300 मिलियन टन और 2047 तक 500 मिलियन टन पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए कोकिंग कोल और आयरन ओर की जरूरत बढ़ रही है। भारत अगले महीने अर्जेंटीना, इंडोनेशिया और ओमान के साथ बातचीत करेगा। इसमें कोकिंग कोल, आयरन ओर की आपूर्ति और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर फोकस होगा।
इस वार्ता के जरिए भारत सरकार अपनी सरकारी खनन कंपनी NMDC के लिए अर्जेंटीना से लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का आयात सुरक्षित करना चाहती है। अर्जेंटीना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा लिथियम उत्पादक देश है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण में लिथियम एक प्रमुख घटक है।




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