दूसरे चरण की जनगणना से पहले जारी होंगे जाति से जुड़े सवाल, संसद में क्या बोली सरकार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिसमें पहली बार जाति गणना शामिल होगी। यह 16वीं जनगणना होगी और यह पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयोजित की जाएगी।

देश की अगली जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि जाति से जुड़े प्रश्नों को दूसरे चरण से पहले अधिसूचित किया जाएगा, जिससे यह तय होगा कि गणनाकर्मी नागरिकों से किस प्रकार की जानकारी जुटाएंगे। सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि 2027 की जनगणना शुरू होने से पूर्व, दूसरे चरण में पूछे जाने वाले जाति संबंधी प्रश्नों को अधिसूचित किया जाएगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि प्रत्येक जनगणना से पहले विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, संगठनों और जनगणना डेटा उपयोगकर्ताओं से प्राप्त सुझावों और जानकारी के आधार पर प्रश्नों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ''दूसरे चरण के लिए जाति सहित प्रश्नों को स्थापित प्रक्रिया के अनुसार अंतिम रूप दिया जाएगा और अधिसूचित किया जाएगा।''
जनगणना दो चरणों में होगी
राय ने बताया कि जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी - अप्रैल से सितंबर 2026 तक आवासीय सूची और आवासीय गणना और फरवरी 2027 में आबादी गणना। आवासीय सूची और आवासीय गणना के दौरान देशभर की सभी संरचनाओं, घरों और परिवारों की व्यवस्थित सूची तैयार की जाएगी, ताकि आबादी गणना के लिए ठोस आधार हो।
जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये आवंटित
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिसमें पहली बार जाति गणना शामिल होगी। यह 16वीं जनगणना होगी और यह पूरी तरह डिजिटल तरीके से आयोजित की जाएगी, जिसमें नागरिकों को स्वयं गणना करने का विकल्प भी मिलेगा। यह 2021 में होना था, लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
कोविड-19 के कारण 2021 में नहीं हुई जनगणना
गौरतलब है कि यह जनगणना पहले 2021 में होनी थी, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। नई जनगणना न केवल तकनीकी रूप से आधुनिक होगी, बल्कि इसमें शामिल जातिगत डेटा आने वाले वर्षों में भारत की सामाजिक और आर्थिक नीतियों को नई दिशा दे सकता है।




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