खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी? अमेरिका ने भेज दिए अपने सैकड़ों पैराट्रुपर्स
मध्य एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका लगातार अपने सैनिकों को इस क्षेत्र में भेज रहा है। अब अमेरिका ने अपने पैराट्रुपर्स की टुकड़ी मध्य एशिया भेजी है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है।

मध्य एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हजारों की संख्या में अमेरिकी सैनिक यहां पहुंच रहे हैं। बीते दिनों अमेरिका ने अपने 2500 से ज्यादा सैनिक इस क्षेत्र में भेजे थे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने अब सेना के एलीट 82वें एयरबॉर्न डिवीजन को मध्य एशिया में भेजा है। यह सैकड़ों पैराट्रुपर्स की टुकड़ी है जो कि आसमान से हमला करने में सक्षम है। इससे पहले अमेरिका ने समुद्री सैनिकों को भेजा था। हालांकि यह नहीं बताया गया कि इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों को कहां तैनात किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने अब जिन सैनिकों को भेजा है उसमें पैराट्रुपर्स, लॉजिस्टिक ऐंड सपोर्ट और ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के सैनिक हैं। अभी इस बात पर कोई फैसला नहीं किया गया है कि इन सैनिकों को ईरान भेजा जाएगा, या फिर किसी अन्य देश में रखा जाएगा। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान की अर्थव्यवस्था के केंद्र खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की बात कही है। इसी द्वीप से ईरान का 90 फीसदी व्यापार होता है। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अमेरिका इन अतिरिक्त सैनिकों का इस्तेमाल द्वीप पर कब्जा करने में कर सकता है।
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अमेरिकी प्रशासन में खर्ग द्वीप पर कब्जा करने को लेकर बातचीत चल रही है। उधर दो दिन पहले ही ईरान की संसद में स्पीकर मोहम्मद बाकेर गलिबफ ने यहां तक कहा कि अगर अमेरिका जमीनी हमला करने की कोशिश करता है तो उसके सैनिकों को आग लगा दी जाएगी। उन्होंने कहा, हमारी गोलीबारी जारी है। हमारी मिसाइलें अपनी जगह पर तैनात हैं। हमारा संकल्प और विश्वास और बढ़ गया है।
गालिबफ ने कहा, "जब तक अमेरिकी ईरान के आत्मसमर्पण की उम्मीद करते रहेंगे, हमारा जवाब साफ है-अपमान स्वीकार करना हमारे लिए नामुमकिन है।" इस बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इस क्षेत्र में इजराइली और अमेरिकी शिक्षण संस्थानों की शाखाओं को निशाना बनाने की धमकी दी। उसने इन्हें 'वैध लक्ष्य' बताया और कहा कि अगर वाशिंगटन ईरानी विश्वविद्यालयों पर अपनी बमबारी की निंदा नहीं करता है, तो वह इन संस्थानों पर हमला करेगा।
यह पहली बार है जब ईरान ने इजराइली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमला करने की धमकी दी है, जो कि तनाव को बढ़ाने का संकेत है। इस क्षेत्र में चल रहे युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी, जिसके चलते इस क्षेत्र के कई विश्वविद्यालयों ने पहले ही ऑनलाइन शिक्षण का रुख कर लिया है। रेड क्रीसेंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमेरिका ने ईरान के 600 से ज्यादा शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया है।




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