Plea in Supreme Court asking 30 percent reservation for women lawyers in law officer posts महिला वकीलों को सरकारी पदों पर मिलेगा 30 फीसदी आरक्षण? SC में याचिका, CJI सूर्यकांत ने भी जताई है चिंता, India News in Hindi - Hindustan
More

महिला वकीलों को सरकारी पदों पर मिलेगा 30 फीसदी आरक्षण? SC में याचिका, CJI सूर्यकांत ने भी जताई है चिंता

याचिका में कहा गया कि सरकारी वकीलों के यही पैनल आगे चलकर जज बनने की रेस में शामिल होते हैं। जब इन पैनलों में ही महिलाएं नहीं होंगी, तो वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज कैसे बनेंगी।

Thu, 21 May 2026 08:57 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
share
महिला वकीलों को सरकारी पदों पर मिलेगा 30 फीसदी आरक्षण? SC में याचिका, CJI सूर्यकांत ने भी जताई है चिंता

देश के कानूनी पेशे में पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक अहम जनहित याचिका दाखिल की गई है। 'लाड़ली फाउंडेशन ट्रस्ट' की ओर से दायर इस याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और राज्य सरकारों के लॉ ऑफिसर पैनल, सरकारी वकीलों की सूचियों और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित कर दी जाएं।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विमलेश पी. पांचोली की पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई कर दी है। इस दौरान CJI ने भी महिलाओं के रिप्रेजेंटेशन को लेकर चिंता जताई है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:आपके सामने माथा टेक रहा हूं, याचिका देखिए; CJI ने बुजुर्ग को क्या दिया रिप्लाई

याचिका में क्या-क्या दलील?

इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने अदालत में याचिका का पक्ष रखते हुए दलील दी। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के बाद से आज तक सुप्रीम कोर्ट में किसी भी महिला वकील को भारत का अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल नहीं बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में देश के अलग अलग हाईकोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए तैनात एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) में से भी एक भी महिला नहीं है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पत्नी चाकरी के लिए नहीं है, खाना ना बनाना कोई क्रूरता नहीं; HC ने पति को सुनाया

याचिका में आगे चिंता जताई गई है कि सरकारी वकीलों के पैनल ही आगे चलकर जज बनने के लिए फीडर पूल का हिस्सा बनते हैं और अगर इन पैनलों में ही महिलाएं होंगी ही नहीं, तो वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जज कैसे बनेंगी? याचिका में कुछ आंकड़े भी पेश किए गए हैं। इसके मुताबिक देश भर में बार काउंसिल में दर्ज कुल 15.4 लाख वकीलों में से केवल 2,84,507 महिलाएं हैं। यह कुल कानूनी वर्कफोर्स का महज 15.31 फीसदी हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट में 37 सालों में केवल 11 महिलाएं

बता दें कि 1989 में जस्टिस एम. फातिमा बीवी के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनने के बाद से पिछले 37 सालों में केवल 11 महिलाएं ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच पाई हैं। वहीं वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों का प्रतिनिधित्व सिर्फ 5.88 फीसदी और हाईकोर्ट में महज 13.76 फीसदी है। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022 के अनुसार, देश के 17 बड़े राज्यों में से 13 राज्यों के सरकारी वकील पैनलों में महिलाओं की संख्या 30 फीसदी से भी कम है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:3 साल से जेल में बंद था पीएम मोदी का 'फर्जी करीबी', SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

CJI सूर्यकांत ने भी जताई चिंता

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी महिला वकीलों के संघर्ष को स्वीकार किया। उन्होंने तेलंगाना बार एसोसिएशन का एक हालिया उदाहरण भी साझा किया। CJI ने कहा, "कल ही तेलंगाना बार एसोसिएशन की महिला सचिव ने बार काउंसिल की सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करने पर सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया। मैंने वहां के बारे में पूछा तो पता चला कि 19,000 वकीलों में से करीब 8,000 नियमित कोर्ट आते हैं, जिनमें 2,000 महिलाएं हैं। लेकिन पद पर केवल एक महिला नियुक्त हो सकी।" CJI ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि महिला वकीलों के लिए स्टाइपेंड की व्यवस्था तो है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि कोर्ट के सरकारी पैनल में होने के बावजूद महिला वकीलों को महीनों तक एक केस भी लड़ने का मौका नहीं मिलता।”