PIL Supreme Court Election Commission implement finger iris biometric identification system क्या मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक सिस्टम लगेगा? सुप्रीम कोर्ट से की गई मांग, India News in Hindi - Hindustan
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क्या मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक सिस्टम लगेगा? सुप्रीम कोर्ट से की गई मांग

याचिका में कहा गया कि चुनाव आयोग मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू करे। इससे केवल असली मतदाता ही वोट डाल सकेंगे और ‘एक नागरिक, एक वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जा सकेगा।

Sat, 28 March 2026 06:16 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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क्या मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और बायोमेट्रिक सिस्टम लगेगा? सुप्रीम कोर्ट से की गई मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों पर फिंगर और आईरिस बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू की जाए। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था में डुप्लिकेट वोटिंग, व्यक्ति छलावा (इंपर्सनेशन) और फर्जी मतदाताओं (घोस्ट वोटिंग) जैसी अनियमितताएं लगातार हो रही हैं। याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है ताकि निर्वाचन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जा सके।

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याचिका में मुख्य मांग यह है कि चुनाव आयोग मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आईरिस आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम शुरू करे। इससे केवल असली मतदाता ही वोट डाल सकेंगे और ‘एक नागरिक, एक वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जा सकेगा। फिलहाल मतदाता पहचान पत्र और मैनुअल वेरिफिकेशन पर निर्भरता होने के कारण पुरानी फोटो, क्लर्किकल खामियां और रीयल-टाइम वैलिडेशन की कमी से दुरुपयोग होता है। बायोमेट्रिक सिस्टम में दोहराव नहीं होने से इन समस्याओं को रोका जा सकता है।

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चुनावी प्रक्रिया में कैसे आएगा सुधार

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की शक्तियों का हवाला देते हुए कहा गया कि वह नियमों में संशोधन कर इस तकनीक को अपनाने में सक्षम है। इससे प्रवासी मतदाताओं, डुप्लिकेट नामों और फर्जी मतदाताओं की समस्या भी हल हो सकेगी। साथ ही रीयल-टाइम ऑडिट ट्रेल तैयार होगा, जो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा।

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याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह व्यवस्था आधार जैसी मौजूदा पहचान प्रणालियों और अन्य सरकारी क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीक के तहत होगी। 28 मार्च को चुनाव आयोग को भी इसी मांग को लेकर प्रतिनिधि भेजा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की जरूरत बताई गई है। याचिका में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अन्य उचित निर्देश भी मांगे गए हैं।