Assam Assembly Election Latest CM Himanta Miya community Badruddin Ajmal hits back असम के चुनावी केंद्र में 'मियां समुदाय', CM हिमंत बोले-इनकी रीढ़ तोड़ देंगे, अजमल का पलटवार, India News in Hindi - Hindustan
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असम के चुनावी केंद्र में 'मियां समुदाय', CM हिमंत बोले-इनकी रीढ़ तोड़ देंगे, अजमल का पलटवार

असम विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मियां समुदाय पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सत्ता आते ही इनकी रीढ़ तोड़ दी जाएगी। AIUDF प्रमुख अजमल ने पलटवार करते हुए कहा कि 4 मई के बाद मियाओं की ही दबंगई चलेगी।

Sat, 28 March 2026 05:21 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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असम के चुनावी केंद्र में 'मियां समुदाय', CM हिमंत बोले-इनकी रीढ़ तोड़ देंगे, अजमल का पलटवार

Assam Assembly Election Latest: असम विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति लगातार गर्म होती जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर से मियां समुदाय को निशाने पर लिया है। सीएम ने कहा कि अगर राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनती है, तो वह 'मियां समुदाय' की रीढ़ तोड़ देंगे। सीएम सरमा के इस बयान पर पलटवार करते हुए बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि सरमा की धमकाने वाली राजनीति नहीं चलेगी। अब 'मियाओं की ही दबंगई होगी।'

असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में सरमा ने मियां समुदाय पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "पिछले पांच सालों में मैंने बांग्लादेशी मियाओं की हड्डियां, हाथ, पैर तोड़ दिए हैं। अगले पांच सालों में हम उनकी रीढ़ भी तोड़ देंगे, ताकि वह लोग हम स्वदेशी लोगों को किसी भी प्रकार की चुनौती न दे सकें।" सरमा के इस बयान का जवाब AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने दिया। उन्होंने कहा, "सरमा की डराने-धमकाने वाली राजनीति अब नहीं चलेगी। वह इस बार का चुनाव हारेंगे और उन्हें असम छोड़ना पड़ेगा। अब मियाओं की ही दबंगई चलेगी।"

बता दें, यह पहली बार नहीं है, जब मुख्यमंत्री सरमा ने मियां समुदाय को निशाने पर लिया है, इससे पहले भी वह इन्हें परेशान करने और राज्य से बाहर निकालने की वकालत कर चुके हैं। इस मामले में उन्हें देश भर में काफी आलोचना का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन वह अपने स्टैंड पर कायम रहे थे।

कौन हैं मियां समुदाय के लोग?

असम की राजनीति में पिछले कुछ दशकों से मियां समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इनको लेकर भाजपा लगातार स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाती रही है। दरअसल, असम में जातीय और भाषाई तनाव 19वीं सदी से चले आ रहे हैं, जब ब्रिटिश शासन ने बंगाली को आधिकारिक भाषा घोषित कर दिया था। आजादी के पहले ब्रिटिश सरकार बागानों में मजदूरी करने के लिए इन लोगों को यहां लाती रही, जो की स्वतंत्रता के बाद भी जारी रहा। 1970 के दशक में जब तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में अत्याचार बढ़ा तो लाखों की संख्या में बंगाली भाषा बोलने वाले लोग असम में बस गए। इन मुस्लिम समुदाय को ही 'मियां समुदाय' कहा जाता है।

असम की डेमोग्राफी की बात करें, तो यहां पर केवल मियां मुस्लिम ही नहीं है, बल्कि इनके अलावा गोरिया और मोरिया जैसे समुदाय भी है। यह असमी भाषी है। 2011 की जनगणना के मुताबिक असम में मुस्लिमों की संख्या करीब 34.22 फीसदी है, इनमें से असमी भाषी मुस्लिमों की संख्या केवल 4 प्रतिशत है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सरमा दावा करते रहे हैं कि अगर 'मियां समुदाय' को असम से बाहर नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में उनकी संख्या करीब 40 फीसदी हो जाएगी। ऐसे में असम में, असमिया लोग ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे।