सुनेत्रा पवार की जगह राज्यसभा जाएंगे बेटे पार्थ पवार, राकांपा नेता ने किया ऐलान
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। पार्टी नेता प्रफुल्ल पवार ने इसको लेकर ऐलान किया है।

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए पार्थ पवार को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। पार्टी नेता प्रफुल्ल पवार ने इसको लेकर ऐलान किया है। उन्होंने कहाकि राकांपा सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए उनके बेटे पार्थ अजित पवार को नामित करेगी। पार्थ पवार, दिवंगत नेता अजित पवार और सुनेत्रा पवार के बेटे हैं।
16 मार्च को होना है मतदान
गौरतलब है कि 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को मतदान होना है। महाराष्ट्र में राकांपा संस्थापक शरद पवार सहित सात सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। साल 2024 के विधानसभा चुनावों में भारी जीत के कारण महाराष्ट्र की 7 में से 6 सीटें सत्ताधारी महायुति के पास जाने की संभावना है। इसमें भाजपा को 3, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 2 और सुनेत्रा पवार की राकांपा को 1 सीट मिल सकती है।
दादा शरद के साथ नजर आ सकते हैं
विपक्षी महाविकास अघाड़ी के पास केवल 1 सीट बचने की उम्मीद है। कयास है कि विपक्ष इस एकमात्र सीट से दिग्गज नेता शरद पवार को राज्यसभा भेज सकता है। यदि ऐसा होता है, तो राज्यसभा में पार्थ पवार और उनके दादा शरद पवार एक साथ नजर आ सकते हैं।
सुनेत्रा लड़ेंगी उपचुनाव
अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई बारामती विधानसभा सीट सुनेत्रा पवार उपचुनाव लड़ेंगी। पार्टी सूत्रों ने पुष्टि की है कि अगले छह महीनों के भीतर होने वाले इस उपचुनाव के लिए वे तैयारी कर रही हैं। साथ ही, उन्हें जल्द ही उन्हें राकांपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने की भी योजना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राकांपा उपचुनाव को निर्विरोध कराने की भी कोशिश करेगी। बारामती विधानसभा क्षेत्र की मसौदा मतदाता सूची 10 मार्च को प्रकाशित की जाएगी, जिसके बाद कभी भी चुनाव की घोषणा की जा सकती है।
संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद सदस्य बने बिना भी मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया जा सकता है। लेकिन पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री का दायित्व संभाला था।




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