Pakistan ISI Behind Punjab twin Blasts Intelligence Flags Desperation Ahead Of Operation Sindoor First Anniversary पंजाब में डबल धमाकों के पीछे PAK? ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से पहले खुफिया एजेंसियों ने चेताया; ISI कनेक्शन जोड़ा, India News in Hindi - Hindustan
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पंजाब में डबल धमाकों के पीछे PAK? ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से पहले खुफिया एजेंसियों ने चेताया; ISI कनेक्शन जोड़ा

Punjab Twin Blast: रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उभरते पैटर्न के केंद्र में शहजाद भट्टी नाम का एक पाकिस्तानी गैंगस्टर है, जिसे खुफिया अधिकारी ISI का मुखौटा बताते हैं।

Wed, 6 May 2026 02:37 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पंजाब में डबल धमाकों के पीछे PAK? ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से पहले खुफिया एजेंसियों ने चेताया; ISI कनेक्शन जोड़ा

Punjab Twin Blast: पंजाब के जालंधर और अमृतसर में मंगलवार (5 मई) की रात सीमा सुरक्षा बल (BSF) मुख्यालय के करीब संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से जुड़े उच्च तीव्रता वाले विस्फोटों ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की पहली बरसी से ठीक पहले इस तरह के हमले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) के संगठित पैटर्न को दिखाती हैं। एजेंसी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से पहले ISI एक बार फिर राज्य में लो-इंटेंसिटी आतंकी गतिविधियों को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।

इंटेलिजेंस एजेंसी के मुताबिक, पंजाब में हुए डबल धमाके कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक संगठित पैटर्न का हिस्सा है और पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा है। दरअसल, पिछले साल ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान नूर खान एयरबेस और उससे जुड़े ऑपरेशनल चैनलों को भारी नुकसान हुआ था, जिससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और आज तक उबर नहीं पाया है। इतना ही नहीं भारत ने सीमा पार से चलने वाले आतंकी नेटवर्क को भी करारा झटका दिया था।

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ISI की हताशा का परिणाम

खुफिया सूत्रों के हवाले से न्यूज 18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि BSF के सेक्टर ऑफिस पर हुए हालिया हमले ISI की हताशा के परिणाम हैं। सूत्रों का कहना है कि ISI अब भारत में गैंगस्टरों का इस्तेमाल कर रही है और सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के ठिकानों पर कम तीव्रता वाले हमले करवा रही है। खुफिया सूत्रों ने बताया कि एजेंसियों को सुरक्षा संस्थानों को निशाना बनाने की कोशिशों के बारे में पहले से ही संकेत मिल गए थे। यह इस बात का संकेत है कि दुश्मन ताकतें भारतीय सुरक्षा बलों का मनोबल तोड़ने और सीमावर्ती इलाकों में असुरक्षा का माहौल पैदा करने की लगातार कोशिश कर रही हैं।

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केंद्र में शहजाद भट्टी नाम का एक पाकिस्तानी गैंगस्टर

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उभरते पैटर्न के केंद्र में शहजाद भट्टी नाम का एक पाकिस्तानी गैंगस्टर है, जिसे खुफिया अधिकारी ISI का मुखौटा बताते हैं। भारतीय एजेंसियों ने पंजाब में आतंकी गतिविधियों से जुड़े कई आपराधिक मामलों में बार-बार भट्टी का नाम लिया है। कभी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा रहा भट्टी बाद में उसका प्रतिद्वंद्वी बन गया। उसने सीमा पार से कथित समर्थन हासिल करके अपना खुद का एक अलग नेटवर्क खड़ा कर लिया। साल 2026 में, बिश्नोई गैंग ने पुर्तगाल में भट्टी पर हुए हमलों की जिम्मेदारी भी ली थी, जिससे यह साफ होता है कि सीमा पार तक फैले इन आपराधिक नेटवर्कों के बीच कितनी हिंसक प्रतिद्वंद्विता चल रही है।

विदेश में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहा भट्टी

खुफिया सूत्रों के अनुसार, जालंधर और अमृतसर में BSF के दो कैंपों पर हुए हालिया हमलों के पीछे भट्टी का ही हाथ होने का शक है। माना जा रहा है कि वह विदेश में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहा है। वह एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके जमीन पर मौजूद अपने गुर्गों को निर्देश देता है। बताया जाता है कि उसका नेटवर्क पंजाब के स्थानीय युवाओं और छोटे-मोटे गैंगस्टरों को अपने साथ जोड़ता है। वह उन्हें हथियार मुहैया कराता है और सुरक्षा संस्थानों, पुलिस थानों, यहाँ तक कि राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमले करवाने की योजना बनाता है।

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ISI की बदली हुई रणनीति

सुरक्षा विशेषज्ञ इसे ISI की नई “हाइब्रिड वॉरफेयर” रणनीति मानते हैं, जिसमें सीधे आतंकियों की घुसपैठ कम और स्थानीय गैंगस्टर और अपराधियों का इस्तेमाल ज्यादा करने पर फोकस किया जाता है। इसके अलावा ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स की तस्करी और नार्कोटिक्स (खासतौर पर हेरोइन) से फंडिंग किया जाता है। यह मॉडल एक “टेरर-क्राइम इकोसिस्टम” तैयार करता है, जो खुद ही अपने लिए पैसा और संसाधन जुटाता है। इन हमलों का उद्देश्य सिर्फ नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सुरक्षा बलों का मनोबल गिराना, जनता में डर का माहौल बनाना, मीडिया का ध्यान खींचना और पंजाब में उग्रवाद की पुरानी यादें ताजा करना है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की बरसी के आसपास इन घटनाओं को अंजाम देना, सरकार को राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश देने की कोशिश भी माना जा रहा है।