अब छिपने की कोई जगह नहीं बची… ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर इजरायल का पाक को संदेश
'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर इजरायली राजदूत रुवेन अजार ने भारत का समर्थन करते हुए कहा कि 'आतंकियों के छिपने के लिए अब कोई जगह नहीं है।' जानिए पहलगाम हमले के बाद इस कड़े एक्शन में इजरायल ने कैसे की थी भारत की मदद।

'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर इजरायल ने भारत के प्रति अपना मजबूत समर्थन और एकजुटता व्यक्त की है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की धरती पर पनप रहे आतंकवादियों के खिलाफ भारत द्वारा की गई इस ऐतिहासिक जवाबी कार्रवाई को याद करते हुए, भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकियों के लिए अब कहीं कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं बची है।
राजदूत रुवेन अजार का कड़ा संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी बात रखते हुए राजदूत अजार ने भारत के आतंकवाद-रोधी अभियान की सराहना की। उन्होंने अपने आधिकारिक हैंडल से लिखा- ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो गया है। आतंकी अब यह अच्छी तरह जान चुके हैं कि निर्दोषों के खिलाफ किए गए उनके जघन्य अपराधों के बाद उनके छिपने के लिए कोई जगह नहीं है।
इजरायली राजदूत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लगातार कड़ा रुख अपनाए हुए है। उनका यह संदेश इस बात का भी प्रतीक है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत और इजरायल कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
क्या था पहलगाम हमला और 'ऑपरेशन सिंदूर'?
पिछले साल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने एक बेहद कायराना और जघन्य हमला किया था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस घटना ने पूरे देश को आक्रोशित कर दिया था। भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया था कि इस हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इसके जवाब में भारतीय रक्षा बलों ने पाकिस्तान के भीतर चल रहे आतंकी लॉन्च पैड्स और प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया। यह एक सटीक और खुफिया जानकारी पर आधारित ऑपरेशन था, जिसने सीमा पार बैठे आतंक के आकाओं को भारी नुकसान पहुंचाया और यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीमा पार जाकर भी आतंकियों का खात्मा करने का माद्दा रखता है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की कैसे मदद करता रहा है इजरायल?
जब भी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई या राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा आता है, इजरायल हमेशा भारत के एक सच्चे और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में खड़ा रहा है।
खुफिया जानकारी और सैटेलाइट इमेजरी: इजरायल के पास दुनिया का सबसे बेहतरीन खुफिया नेटवर्क और सर्विलांस सिस्टम है। भारत और इजरायल के बीच खुफिया जानकारियों का लगातार आदान-प्रदान होता है। सीमा पार आतंकी गतिविधियों को ट्रैक करने, सैटेलाइट इमेजरी और संचार को इंटरसेप्ट करने में इजरायली तकनीक भारत के बहुत काम आती रही है।
अत्याधुनिक हथियार और रक्षा उपकरण: इससे पहले हुए 'बालाकोट एयरस्ट्राइक' में भी भारतीय वायुसेना ने इजरायल निर्मित 'स्पाइस 2000' (SPICE) बमों का इस्तेमाल कर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। इसके अलावा इजरायली हेरॉन ड्रोन भारतीय सीमाओं की निगरानी में अहम भूमिका निभाते हैं।
कश्मीर और अन्य सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ रोकने के लिए भारत कई इजरायली सेंसर, रडार और स्मार्ट फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल करता है।
ऐतिहासिक समर्थन
चाहे 1999 का कारगिल युद्ध हो, जहां इजरायल ने भारत को लेजर-गाइडेड बम और अनमैन्ड एरियल व्हीकल मुहैया कराए थे, या फिर हाल के वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति, इजरायल ने हर वैश्विक मंच पर भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का खुलकर समर्थन किया है। चूंकि भारत और इजरायल दोनों ही दशकों से पड़ोसी देशों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेल रहे हैं, इसलिए दोनों का दर्द और आतंकवाद से निपटने का नजरिया काफी समान है।




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