ईरान युद्ध में अब तेल और गैस के कुओं पर निशाना, भारत ने जताई चिंता, कहा- तुरंत बंद हो
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में अब दोनों तरफ से तेल और गैस के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इजरायल ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में ईरान ने कतर समेत कई खाड़ी देशों के ठिकानों को निशाना बनाया है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में दोनों तरफ से अब तेल और गैस के कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया जा रहा है। इजरायल, ईरान को निशाना बना रहा है, तो इजरायल पलटवार करते हुए कतर सऊदी अरब, कतर और बहरीन जैसे देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहा है। इन हमलों ने अन्य देशों की चिंता को बढ़ा दिया है। भारत सरकार ने भी इन हमलों को चिंताजनक बताते हुए इन्हें तुरंत रोके जाने का आह्वान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध पर मीडिया से बात करते हुए जायसवाल ने इस पूरे मामले पर भारत की स्थिति को साफ किया। उन्होंने कहा, "भारत ने पहले ही पूरे ऊर्जा ठिकानों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया है। हाल के समय में इस क्षेत्र के कई ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया है, जो कि बहुत चिंताजनक है। यह हमले पूरे वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को ही अनिश्चितता के स्तर पर ले जाते हैं। ऐसे हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते, इसलिए इन्हें तुरंत ही बंद कर दिया जाना चाहिए।"
भारत ही नहीं पूरे विश्व के लिए चुनौती बना ईरान युद्ध: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह युद्ध केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सभी देशों के लिए एक चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा, "यह युद्ध न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय के लिए एक कठिन समय है। हमारे नेता अपने समकक्षों के संपर्क में है। हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा संबंधी जरूरतों के लिए कई देशों के संपर्क में है।"
भारतीयों की सुरक्षा, सरकार की प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को भारतीय कूटनीति के लिए एक परीक्षा की घड़ी कहे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सटीकता के साथ इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा, "कुछ दिन पहले आपने देखा कि हमारी सक्रिय भागीदारी के कारण...और कई हितधारकों के साथ बातचीत और कूटनीति के माध्यम से, हमने एलपीजी लदे अपने दो जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराया है।'' उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में कई हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि ''हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को पूरा कर सकें'' और साथ ही इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में मौजूद अपने भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हुए हमले के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष 20 दिन से लगातार जारी है। इस युद्ध में अब तक ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे जा चुके हैं। इसके अलावा सैंकडों आम लोगों की भी जान गई है। इजरायल की तरफ से ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ईरान की तरफ से भी इसका पलटवार करते हुए खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों को निशाना बनाया जा रहा है। कतर, यूएई जैसे देशों के तेल और गैस के कुओं, तेल रिफाइनरियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। भारत समेत तमाम देशों ने इस पर चिंता जाहिर की है। क्योंकि खाड़ी क्षेत्र का यह ऊर्जा भंडार केवल ईरान और इस क्षेत्र के लिए ही नहीं वरन् विश्व के तमाम देशों के लिए भी जरूरी है।




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