Mamata Banerjee Faces Dual Challenge Will TMC Surrender before Congress सड़क पर उतरें या सिंबल बचाएं, ममता के सामने TMC को बचाने की चुनौती; कांग्रेस के आगे करना होगा सरेंडर?, India News in Hindi - Hindustan
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सड़क पर उतरें या सिंबल बचाएं, ममता के सामने TMC को बचाने की चुनौती; कांग्रेस के आगे करना होगा सरेंडर?

राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका पहले की तुलना में कमजोर हुई है। इंडिया गठबंधन में प्रभाव बनाए रखना और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करना उनके लिए एक नई चुनौती बन गई है।

Fri, 5 June 2026 05:25 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, ● पंकज कुमार पांडेय, नई दिल्ली।
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सड़क पर उतरें या सिंबल बचाएं, ममता के सामने TMC को बचाने की चुनौती; कांग्रेस के आगे करना होगा सरेंडर?

ममता बनर्जी इस समय अपनी राजनीतिक पारी की सबसे मुश्किल चुनौती से जूझ रही हैं। संघर्ष से अपनी पहचान बनाने वाली 71 वर्षीय ममता क्या अब दोबारा उस भूमिका में आ सकती हैं? पार्टी के अंदर विद्रोह ने इस सवाल को काफी पेचीदा बना दिया है। ममता सड़क पर संघर्ष करें या पहले पार्टी का अस्तित्व और सिंबल बचाएं, यह बड़ी चुनौती उनके सामने है।

विधानसभा में टीएमसी की कमजोर स्थिति से यह आशंका प्रबल हो गई है कि ममता फिलहाल केंद्रीय राजनीति में भी पहले जैसी मजबूत भूमिका में नहीं रहेंगी। विपक्ष में प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए उन्हें उसी कांग्रेस के सामने झुकना होगा, जिनके ऊपर टीएमसी अपनी शर्तें मजबूती से थोपती थी। फिलहाल लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी के कई सांसद असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। अगर वे अलग हुए तो ममता को महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी की तरह चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को बचाने की है। तृणमूल कांग्रेस के दर्जनों विधायक बागी रुख अपना चुके हैं और पार्टी के भीतर समानांतर शक्ति केंद्र उभरने लगे हैं। हाल के कार्यक्रमों और बैठकों में सांसदों, विधायकों की कम उपस्थिति ने ममता के सामने चुनौती स्पष्ट कर दी है। संगठन को बचाने के लिए पार्टी ने अपने कई मोर्चों में बड़े बदलाव किए हैं, लेकिन असंतोष खत्म होता नहीं दिख रहा।

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राष्ट्रीय राजनीति में भी ममता बनर्जी की भूमिका पहले की तुलना में कमजोर हुई है। इंडिया गठबंधन में प्रभाव बनाए रखना और राष्ट्रीय विपक्ष की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करना उनके लिए एक नई चुनौती बन गई है।

कानूनी चुनौतियां भी ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले, संदेशखाली विवाद और अन्य मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी नजर है। भाजपा के केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर मजबूत होने के बाद इन मामलों में दबाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। सीआईडी के बाद ईडी की दस्तक से ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी मुश्किल में घिरते दिख रहे हैं और ममता द्वारा बनाया गया वर्षों पुराना कैडर जमीन पर बिखरता दिख रहा है।